Search

Festive” ke results

Sher

तुम्हारी दीद हो जाए हमारी ईद हो जाए

Afzal Sultanpuri

ईदी कोई हम को भी दे मुश्किल है अब रहना तन्हा

RAAHI

मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे

Ali Zaryoun

ईद का चाँद तुम ने देख लिया चाँद की ईद हो गई होगी

Idris Azad

वैसे एक शिकवा था तुम सेे अच्छा छोडो ईद मुबारक

Zubair Ali Tabish

ईद ख़ुशियों का दिन सही लेकिन इक उदासी भी साथ लाती है ज़ख़्म उभरते हैं जाने कब कब के जाने किस किस की याद आती है

Farhat Ehsaas

मेहनत तो करता हूँ फिर भी घर ख़ाली है बाबूजी मिट्टी के कुछ दीपक ले लो दीवाली है बाबूजी मिट्टी बेच रहा हूँ जिस में कोई जाल फ़रेब नहीं सोना चाँदी दूध मिठाई सब जा'ली है बाबूजी

Gyan Prakash Akul

फ़क़त दो-चार ईदें और बढ़ा दे साल में या रब गले बाबा के लगने को बहाने चाहता हूँ मैं

Haider Khan

हर गीत में हर बार गाऊँगा तुझे अपनी ग़ज़ल में गुनगुनाऊँगा तुझे तू ईद है और तू ही दीवाली मेरी मैं हर बरस यूँँही मनाऊँगा तुझे

Krishnakant Kabk

न वैसा चाँद फिर निकला न वैसी ईद फिर आई किसी ने जब मेरी ईदी मेरे होंटों पे रख दी थी

Ritesh Rajwada

Nazm

"दरख़्त-ए-ज़र्द" नहीं मालूम 'ज़रयून' अब तुम्हारी उम्र क्या होगी वो किन ख़्वाबों से जाने आश्ना ना-आश्ना होगी तुम्हारे दिल के इस दुनिया से कैसे सिलसिले होंगे तुम्हें कैसे गुमाँ होंगे तुम्हें कै

Jaun Elia

मैं बंजारा वक़्त के कितने शहरों से गुज़रा हूँ लेकिन वक़्त के इस इक शहर से जाते जाते मुड़ के देख रहा हूँ सोच रहा हूँ तुम से मेरा ये नाता भी टूट रहा है तुम ने मुझ को छोड़ा था जिस शहर में आ कर वक़

Javed Akhtar

ऐ सिपहर-ए-बरीं के सय्यारो ऐ फ़ज़ा-ए-ज़मीं के गुल-ज़ारो ऐ पहाड़ों की दिल-फ़रेब फ़ज़ा ऐ लब-ए-जू की ठंडी ठंडी हवा ऐ अनादिल के नग़मा-ए-सहरी ऐ शब-ए-माहताब तारों भरी ऐ नसीम-ए-बहार के झोंको दहर

Altaf Hussain Hali

"दिवाली" मिरी साँसों को गीत और आत्मा को साज़ देती है ये दिवाली है सब को जीने का अंदाज़ देती है हृदय के द्वार पर रह रह के देता है कोई दस्तक बराबर ज़िंदगी आवाज़ पर आवाज़ देती है सिमटता है अँधेर

Nazeer Banarasi

दुआ दुआ वो चेहरा हया हया वो आँखें सबा सबा वो ज़ुल्फ़ें चले लहू गर्दिश में रहे आँख में दिल में बसे मिरे ख़्वाबों में जले अकेले-पन में मिले हर इक महफ़िल में दुआ दुआ वो चेहरा कभी किसी चिलमन के प

Obaidullah Aleem

बाप की उँगली था में इक नन्हा सा बच्चा पहले-पहल मेले में गया तो अपनी भोली-भाली कंचों जैसी आँखों से इक दुनिया देखी ये क्या है और वो क्या है सब उस ने पूछा बाप ने झुक कर कितनी सारी चीज़ों और खेलो

Javed Akhtar

"छोटी सी शॉपिंग" गोटे वाली लाल ओढ़नी उस पर चोली-घागरा उसी से मैचिंग करने वाला छोटा सा इक नागरा छोटी सी! ये शॉपिंग थी या! कोई जादू-टोना लम्बा चौड़ा शहर अचानक बन कर एक खिलौना इतिहासों का जाल तोड़ के दा

Nida Fazli

कहीं पड़े न मोहब्बत की मार होली में अदास प्रेम करो दिल से प्यार होली में गले में डाल दो बाँहों का हार होली में उतारो एक बरस का ख़ुमार होली में मिलो गले से गले बार बार होली में लगा के आग बढ़ी

Nazeer Banarasi

दुनिया-भर से दूर ये नगरी नगरी दुनिया-भर से निराली अंदर अरमानों का मेला बाहरस देखो तो ख़ाली हम हैं इस कुटिया के जोगी हम हैं इस नगरी के वाली हम ने तज रक्खा है ज़माना तुम आना तो तन्हा आना दिल इक

Ibn E Insha

"ये न पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है" ये न पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है दिल के तारो को छेड़ा है और दुखों का तोड़ लिखा है जीवन में जो कुछ होता है गुणा घटाना जोड़ लिखा है हँसी

Ananya Rai Parashar

Ghazal

कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी बात वो आधी रात की रात वो पूरे चाँद की चाँद भी ऐन चैत का उस पे तिरा जमाल भी सब से नज़र बचा के वो मुझ को कुछ ऐसे

Parveen Shakir

ये हिजरतों का ज़माना भी क्या ज़माना है उन्हीं से दूर हैं जिन के लिए कमाना है ख़ुशी ये है कि मिरे घर से फ़ोन आया है सितम ये है कि मुझे ख़ैरियत बताना है हमें ये बात बहुत देर में समझ आई वहीं तो जाल बिछा

Syed Sarosh Asif

बस कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना आदमी को भी मुयस्सर नहीं इंसाँ होना गिर्या चाहे है ख़राबी मिरे काशाने की दर ओ दीवार से टपके है बयाबाँ होना वा-ए-दीवानगी-ए-शौक़ कि हर दम मुझ को आप जाना उधर और आप ह

Mirza Ghalib

तुम्हारे जाने का हम को मलाल थोड़ी है उदासियों में तुम्हारा ख़याल थोड़ी है मनाऊँ किस तरह होली मैं दोस्तों के साथ हैं सब के हाथ में ख़ंजर गुलाल थोड़ी है मुझे ये ग़म है वो अब साथ है रक़ीबों के

Nadim Nadeem

तुम जो कहते हो सुनूँगा जो पुकारोगे मुझे जानता हूँ कि तुम ही घेर के मारोगे मुझे मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मै

Ali Zaryoun

'इंशा'-जी उठो अब कूच करो इस शहर में जी को लगाना क्या वहशी को सुकूँ से क्या मतलब जोगी का नगर में ठिकाना क्या इस दिल के दरीदा दामन को देखो तो सही सोचो तो सही जिस झोली में सौ छेद हुए उस झोली का फ

Ibn E Insha

मिलाते हो उसी को ख़ाक में जो दिल से मिलता है मिरी जाँ चाहने वाला बड़ी मुश्किल से मिलता है कहीं है ईद की शादी कहीं मातम है मक़्तल में कोई क़ातिल से मिलता है कोई बिस्मिल से मिलता है पस-ए-पर्दा भी

Dagh Dehlvi

और क्या आख़िर तुझे ऐ ज़िंदगानी चाहिए आरज़ू कल आग की थी आज पानी चाहिए ये कहाँ की रीत है जागे कोई सोए कोई रात सब की है तो सब को नींद आनी चाहिए इस को हँसने के लिए तो उस को रोने के लिए वक़्त की झोल

Madan Mohan Danish

कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी बात वो आधी रात की रात वो पूरे चाँद की चाँद भी ऐन चैत का उस पे तिरा जमाल भी सब से नज़र बचा के वो मुझ को कु

Parveen Shakir

इंशा'-जी उठो अब कूच करो इस शहर में जी को लगाना क्या वहशी को सुकूँ से क्या मतलब जोगी का नगर में ठिकाना क्या इस दिल के दरीदा दामन को देखो तो सही सोचो तो सही जिस झोली में सौ छेद हुए उस झोली का फैलाना

Ibn E Insha