ا سے کی یاد مری ہر غم ہے وہ ہے وہ یوں مرہم سی ضرورت نہیں بھولے ساری دنیا کو بھولے بھی ا سے کی صورت نہیں بھولے تھامے رکھا ہے اب بھی تو ہے وہ ہے وہ ہے وہ نے یادوں ہے وہ ہے وہ دامن حقیقت تجھ ہی پر ایک مرنے کی حقیقت ہی فطرت نہیں بھولے چلنا ہے اب ک ہاں تک یوں اب یہ ہے جانتے ہم بھی تجھ کو پانے کی دنیا سے اک حقیقت حسرت نہیں بھولے
Related Nazm
''चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ'' चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ जो लफ़्ज़ कहूँ वो हो जाए बस अश्क कहूँ तो एक आँसू तेरे गोरे गाल को धो जाए मैं आ लिक्खूँ तू आ जाए मैं बैठ लिक्खूँ तू आ बैठे मेरे शाने पर सर रक्खे तू मैं नींद कहूँ तू सो जाए मैं काग़ज़ पर तेरे होंठ लिक्खूँ तेरे होंठों पर मुस्कान आए मैं दिल लिक्खूँ तू दिल था में मैं गुम लिक्खूँ वो खो जाए तेरे हाथ बनाऊँ पेंसिल से फिर हाथ पे तेरे हाथ रखूँ कुछ उल्टा सीधा फ़र्ज़ करूँँ कुछ सीधा उल्टा हो जाए मैं आह लिखूँ तू हाए करे बेचैन लिखूँ बेचैन हो तू फिर बेचैन का बे काटूँ तुझे चैन ज़रा सा हो जाए अभी ऐन लिखूँ तू सोचे मुझे फिर शीन लिखूँ तेरी नींद उड़े जब क़ाफ़ लिखूँ तुझे कुछ कुछ हो मैं इश्क़ लिखूँ तुझे हो जाए
Amir Ameer
295 likes
یاد ہے پہلے روز کہا تھا یاد ہے پہلے روز کہا تھا پھروں نہ کہنا غلطی دل کی پیار سمجھ کے کرنا لڑکی پیار نبھانا ہوتا ہے پھروں پار لگانا ہوتا ہے یاد ہے پہلے روز کہا تھا ساتھ چلو تو پورے سفر تک مر جانے کی اگلی خبر تک سمجھو یار خدا تک ہوگا سارا پیار وفا تک ہوگا پھروں یہ بندھن توڑ نہ جانا چھوڑ گئے تو پھروں نہ آنا چھوڑ دیا جو تیرا نہیں ہے چلا گیا جو میرا نہیں ہے یاد ہے پہلے روز کہا تھا یا تو ٹوٹ کے پیار نہ کرنا یا پھروں پیٹھ پہ وار نہ کرنا جب نادانی ہو جاتی ہے نئی کہانی ہو جاتی ہے نئی کہانی لکھ لاوں گا اگلے روز میں بک جاؤں گا تیرے گل جب کھیل جائیں گے مجھ کو پیسے مل جائیں گے یاد ہے پہلے روز کہا تھا بچھڑ گئے تو موج اڑانا واپس میرے پاس نہ آنا جب کوئی جا کر واپس آئے روئے تڑپے یا پچھتائے میں پھروں اس کو ملتا نہیں ہوں ساتھ دوبارہ چلتا نہیں ہوں گم جاتا ہوں کھو جاتا ہوں میں پتھر کا ہو جاتا ہوں
Khalil Ur Rehman Qamar
191 likes
"हम मिलेंगे कहीं" हम मिलेंगे कहीं अजनबी शहर की ख़्वाब होती हुई शाहराओं पे और शाहराओं पे फैली हुई धूप में एक दिन हम कहीं साथ होगे वक़्त की आँधियों से अटी साहतों पर से मिट्टी हटाते हुए एक ही जैसे आँसू बहाते हुए हम मिलेंगे घने जंगलो की हरी घास पर और किसी शाख़-ए-नाज़ुक पर पड़ते हुए बोझ की दास्तानों में खो जाएँगे हम सनोबर के पेड़ों की नोकीले पत्तों से सदियों से सोए हुए देवताओं की आँखें चभो जाएँगे हम मिलेंगे कहीं बर्फ़ के बाजुओं में घिरे पर्वतों पर बाँझ क़ब्रो में लेटे हुए कोह पेमाओं की याद में नज़्म कहते हुए जो पहाड़ों की औलाद थे, और उन्हें वक़्त आने पर माँ बाप ने अपनी आग़ोश में ले लिया हम मिलेंगे कही शाह सुलेमान के उर्स में हौज़ की सीढियों पर वज़ू करने वालो के शफ़्फ़ाफ़ चेहरों के आगे संगेमरमर से आरस्ता फ़र्श पर पैर रखते हुए आह भरते हुए और दरख़्तों को मन्नत के धागो से आज़ाद करते हुए हम मिलेंगे हम मिलेंगे कहीं नार मेंडी के साहिल पे आते हुए अपने गुम गश्तरश्तो की ख़ाक-ए-सफ़र से अटी वर्दियों के निशाँ देख कर मराकिस से पलटे हुए एक जर्नेल की आख़िरी बात पर मुस्कुराते हुए इक जहाँ जंग की चोट खाते हुए हम मिलेंगे हम मिलेंगे कहीं रूस की दास्ताओं की झूठी कहानी पे आँखों में हैरत सजाए हुए, शाम लेबनान बेरूत की नरगिसी चश्मूरों की आमद के नोहू पे हँसते हुए, ख़ूनी कज़ियो से मफ़लूह जलबानियाँ के पहाड़ी इलाक़ों में मेहमान बन कर मिलेंगे हम मिलेंगे एक मुर्दा ज़माने की ख़ुश रंग तहज़ीब में ज़स्ब होने के इमकान में इक पुरानी इमारत के पहलू में उजड़े हुए लाँन में और अपने असीरों की राह देखते पाँच सदियों से वीरान ज़िंदान में हम मिलेंगे तमन्नाओं की छतरियों के तले, ख़्वाहिशों की हवाओं के बेबाक बोसो से छलनी बदन सौंपने के लिए रास्तों को हम मिलेंगे ज़मीं से नमूदार होते हुए आठवें बर्रे आज़म में उड़ते हुए कालीन पर हम मिलेंगे किसी बार में अपनी बकाया बची उम्र की पायमाली के जाम हाथ में लेंगे और एक ही घूंट में हम ये सैयाल अंदर उतारेंगे और होश आने तलक गीत गायेंगे बचपन के क़िस्से सुनाता हुआ गीत जो आज भी हम को अज़बर है बेड़ी बे बेड़ी तू ठिलदी तपईये पते पार क्या है पते पार क्या है? हम मिलेंगे बाग़ में, गाँव में, धूप में, छाँव में, रेत में, दश्त में, शहर में, मस्जिदों में, कलीसो में, मंदिर में, मेहराब में, चर्च में, मूसलाधार बारिश में, बाज़ार में, ख़्वाब में, आग में, गहरे पानी में, गलियों में, जंगल में और आसमानों में कोनो मकाँ से परे गैर आबद सैयाराए आरज़ू में सदियों से ख़ाली पड़ी बेंच पर जहाँ मौत भी हम से दस्तो गरेबाँ होगी, तो बस एक दो दिन की मेहमान होगी
Tehzeeb Hafi
236 likes
رمز جاناں جب آوگی تو کھویا ہوا پاؤ گی مجھے مری تنہائی ہے وہ ہے وہ خوابوں کے سوا کچھ بھی نہیں مری کمرے کو سجانے کی تمنا ہے تمہیں مری کمرے ہے وہ ہے وہ کتابوں کے سوا کچھ بھی نہیں ان کتابوں نے بڑا ظلم کیا ہے مجھ پر ان ہے وہ ہے وہ اک رمز ہے ج سے رمز کا مارا ہوا ذہن مژدہ عشرت انجام نہیں پا سکتا زندگی ہے وہ ہے وہ کبھی آرام نہیں پا سکتا
Jaun Elia
216 likes
تمہیں اک بات کہنی تھی اجازت ہوں تو کہ دوں ہے وہ ہے وہ ہے وہ یہ بھیگا بھیگا سا موسم یہ تتلی پھول اور شبنم چمکتے چاند کی باتیں یہ بوندیں اور برساتیں یہ کالی رات کا آنچل ہوا ہے وہ ہے وہ ناچتے بادل دھڑکتے موسموں کا دل مہکتی سرسرا کا دل یہ سب جتنے نظارے ہیں کہو ک سے کے اشارے ہیں سبھی باتیں سنی جاناں نے پھروں آنکھیں پھیر لیں جاناں نے ہے وہ ہے وہ ہے وہ تب جا کر کہی سمجھا کہ جاناں نے کچھ نہیں سمجھا ہے وہ ہے وہ ہے وہ قصہ بڑھوا کر کے ذرا نیچی نظر کر کے یہ کہتا ہوں ابھی جاناں سے محبت ہوں گئی جاناں سے
Zubair Ali Tabish
117 likes
More from Naviii dar b dar
بچپن عمر کی ا سے دہلیز پہ یوں بھولے پن ہے وہ ہے وہ رہنا ہے اے زندگی مجھے اب بھی اسی بچپن ہے وہ ہے وہ رہنا ہے ناسمجھی کے حقیقت سارے قصے اور حقیقت اندھیرا سچی تھیں ا سے دور کی باتیں بھی تو ا سے دور سے اچھی تھیں میٹھی یادوں کے سائے لیے آنکھوں کے درپن ہے وہ ہے وہ رہنا ہے اے زندگی مجھے اب بھی اسی بچپن ہے وہ ہے وہ رہنا ہے
Naviii dar b dar
1 likes
"क़द्र" मेरी बातों को अपने दिल में याद कौन रखेगा ज़िंदगानी की रिवायतों को आबाद कौन रखेगा जब मुंसिफ़ का इंसाफ़ दिलों को जोड़ डालेगा तब भला अपने घरों को बर्बाद कौन रखेगा क़िस्मतों को कोसने से कुछ हासिल नहीं होता वगरना उस के दर पे दु'आओं की फ़रियाद कौन रखेगा हर ख़्वाब पूरे न हो पाएँ अगर तो उन हसीं सपनों की बुनियाद कौन रखेगा चल रहे हैं जो मंज़िलों को पाने की तलाश में ठोकरों में भी हौसलें की दाद कौन रखेगा कुछ उसूलों के पाबंद हम भी नज़र आते हैं 'नवी' मेरी उन नादानियों को मेरे बा'द कौन रखेगा ज़रा क़द्र करो माँ के साए की भी तुम उस के जाने से फिर सिर पे हाथ कौन रखेगा
Naviii dar b dar
1 likes
میٹھی تکرار میرے حالات کو جاناں جانکر کیوں مسکراتے ہوں فقط خاموش رہتے ہوں نگاہیں کیوں چراتے ہوں جو دل ہے وہ ہے وہ بات ہے مجھ کو بھلا کہکے تو دیکھو جاناں یہ نظریں چار ہوں کیسے مجھے جاناں بھول جاتے ہوں ہزاروں خواب ایسے ہیں جو ملائے گا ہوں نہیں سکتے محبت کے سفر ہے وہ ہے وہ دل ادھورے ہوں نہیں سکتے ملیں مجھ کو ستارے تم چاند قدموں ہے وہ ہے وہ نہ لاؤں یہ وعدہ کرتے ہوں مجھ سے اسی پل بھول جاتے ہوں
Naviii dar b dar
1 likes
"भोपाल" बहुत बरस पहले की एक वो बात निगली कितनी ज़िन्दगियाँ चंद पलों की एक रात क्या बच्चे क्या जवाँ बिछड़ गए न जाने कहाँ थी जो कभी सुहागिन आज बन गई थी अभागिन हर तरफ़ था बेबसी का नज़ारा क्या था मेरा क्या तुम्हारा हाथों में वो बच्चे मानो चैन की नींद सो रहे हों हर तरफ़ चित्कारें मानो अपनो को खो रहे हों मेहँदी जो हाथों से उतरी भी न थी अश्कों से मानों ख़ुद को भिगो रहे हों था कैसा वो भयानक मंज़र ज़मीं ख़ुद हो गई थी बंजर रोने लगे थे हर जज़्बात बदल गए चंद पलों में हालात बहुत बरस पहले की एक वो बात निगली कितनी ज़िन्दगियाँ चंद पलों की एक रात था कैसा वो हर एक पल सदमों भरा थे हर तरफ़ सह में लोग नज़रें व्याकुल मन अधमरा किस शब्दों में बयाँ करूँँ वो हालात जब अपने खोते चले गए मौत की आग़ोश में सोते चले गए वो कैसी हवा चली थी ज़हर भरी वो एक भयानक रात थी क़हर भरी रूह काँप उठती है मेरी वो मंज़र सोच कर दुनिया सभी की उजड़ी थी जो थी हरी भरी सोचता हूँ 'नवी' इल्ज़ाम किस को दूँ इंतक़ाम किस सेे लूँ मैं यूँँ ही वक़्त को कोसता रहा आँखों में थी नमी गहरी साँस लिए सोचता रहा हे ऊपरवाले रहमत अता कर हर इंसान पर इंसानियत ज़िंदा रहे हर अंजाम पर मज़हबों में फ़र्क न लाए कोई कहीं यक़ीन करें उस अल्लाह उस भगवान पर शामिल है 'नवी' उस हर ग़म में जिस ने खोया अपना लाल वो टीस अभी भी मिटी नहीं जिस का दंश अब भी झेल रहा भोपाल
Naviii dar b dar
1 likes
"सियासत का शोर" है हर तरफ़ शोर सियासत का न मुहाना न छोर सियासत का खेल के पाले सी इस की दुनिया फिर भी जलवा चारों ओर सियासत का है कहीं घोड़े गाय की सियासत अब तो कहीं अपने पराए की सियासत अब कहीं धर्म और जाति के मुद्दे तो कहीं छूटते साए की सियासत अब बंद ज़बाँ में भी बता जाते है वो मक़सद फिर भी ख़र्चा हर ओर सियासत का मुल्क की हिफ़ाज़त की अब कौन सोचता है सत्ता के हाथों में बस पैसा नोचता है है विवादों में जो घिरने वाला फिर भी नहीं वो चोर सियासत का है कहीं मस्जिदों और मंदिरों की लड़ाई कहीं बदज़बानी कहीं ख़ंजरों की लड़ाई भूखे से पूछो एक निवाले की क़ीमत है जो शिकार इस घोर सियासत का
Naviii dar b dar
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Naviii dar b dar.
Similar Moods
More moods that pair well with Naviii dar b dar's nazm.







