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Umeed” ke results

Sher

दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है

Faiz Ahmad Faiz

सौ सौ उमीदें बँधती है इक इक निगाह पर मुझ को न ऐसे प्यार से देखा करे कोई

Allama Iqbal

निगाहों के तक़ाज़े चैन से मरने नहीं देते यहाँ मंज़र ही ऐसे हैं कि दिल भरने नहीं देते हमीं उन से उमीदें आसमाँ छूने की करते हैं हमीं बच्चों को अपने फ़ैसले करने नहीं देते

Waseem Barelvi

तुम सेे मिल कर इतनी तो उम्मीद हुई है इस दुनिया में वक़्त बिताया जा सकता है

Manoj Azhar

किसी से छोटी सी एक उम्मीद बाँध लीजिए मोहब्बतों का अगर जनाज़ा निकालना है

Shakeel Jamali

मैं अब किसी की भी उम्मीद तोड़ सकता हूँ मुझे किसी पे भी अब कोई ए'तिबार नहीं

Jawwad Sheikh

तेरे वादे से प्यार है लेकिन अपनी उम्मीद से नफ़रत है पहली ग़लती तो इश्क़ करना थी शा'इरी दूसरी हिमाक़त है

Mehshar Afridi

झिझकता हूँ उसे इल्ज़ाम देते कोई उम्मीद अब भी रोकती है

Shariq Kaifi

किसी से कोई भी उम्मीद रखना छोड़ कर देखो तो ये रिश्ते निभाना किस क़दर आसान हो जाए

Waseem Barelvi

कोशिश भी कर उमीद भी रख रास्ता भी चुन फिर इस के ब'अद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर

Nida Fazli

Nazm

तुम्हारा फ़ोन आया है अजब सी ऊब शामिल हो गई है रोज़ जीने में पलों को दिन में, दिन को काट कर जीना महीने में महज़ मायूसियाँ जगती हैं अब कैसी भी आहट पर हज़ारों उलझनों के घोंसले लटके हैं चौखट पर अचा

Kumar Vishwas

"मुझ सेे पहले" मुझ सेे पहले तुझे जिस शख़्स ने चाहा उस ने शायद अब भी तिरा ग़म दिल से लगा रक्खा हो एक बे-नाम सी उम्मीद पे अब भी शायद अपने ख़्वाबों के जज़ीरों को सजा रक्खा हो मैं ने माना कि वो

Ahmad Faraz

रुख़्सत हुआ वो बाप से ले कर ख़ुदा का नाम राह-ए-वफ़ा की मंज़िल-ए-अव्वल हुई तमाम मंज़ूर था जो माँ की ज़ियारत का इंतिज़ाम दामन से अश्क पोंछ के दिल से किया कलाम इज़हार-ए-बे-कसी से सितम होगा और भी देख

Chakbast Brij Narayan

(1) ताज़ा हैं अभी याद में ऐ साक़ी-ए-गुलफ़ाम वो अक्स-ए-रुख़-ए-यार से लहके हुए अय्याम वो फूल सी खुलती हुई दीदार की साअत वो दिल सा धड़कता हुआ उम्मीद का हंगाम उम्मीद कि लौ जागा ग़म-ए-दिल का नसीबा ल

Faiz Ahmad Faiz

मैं ने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी मुझ को रातों की सियाही के सिवा कुछ न मिला मैं वो नग़्मा हूँ जिसे प्यार की महफ़िल न मिली वो मुसाफ़िर हूँ जिसे कोई भी मंज़िल न मिली ज़ख़्म पाए हैं बहारों क

Sahir Ludhianvi

"बड़ी लंबी कहानी है यार" ये दास्ताँ लंबी कि इतनी बीच में थक जाऊँगा तुम क्या सुनोगी कब तलक मैं क्या बयाँ कर पाऊँगा! अब देख लेते हैं कि जानम साथ में उम्मीद का ये पल सुनहरा मिल गया है इत

Piyush Mishra

मैं ने उस से ये कहा ये जो दस करोड़ हैं जहल का निचोड़ हैं उन की फ़िक्र सो गई हर उमीद की किरन ज़ुल्मतों में खो गई ये ख़बर दुरुस्त है उन की मौत हो गई बे-शुऊर लोग हैं ज़िंदगी का रोग हैं और तेरे

Habib Jalib

आज की शब तो किसी तौर गुज़र जाएगी रात गहरी है मगर चाँद चमकता है अभी मेरे माथे पे तिरा प्यार दमकता है अभी मेरी साँसों में तिरा लम्स महकता है अभी मेरे सीने में तिरा नाम धड़कता है अभी ज़ीस्त करने को

Parveen Shakir

ऐ सिपहर-ए-बरीं के सय्यारो ऐ फ़ज़ा-ए-ज़मीं के गुल-ज़ारो ऐ पहाड़ों की दिल-फ़रेब फ़ज़ा ऐ लब-ए-जू की ठंडी ठंडी हवा ऐ अनादिल के नग़मा-ए-सहरी ऐ शब-ए-माहताब तारों भरी ऐ नसीम-ए-बहार के झोंको दहर

Altaf Hussain Hali

एक शाइ'र दोस्त से घर में बैठे हुए क्या लिखते हो बाहर निकलो देखो क्या हाल है दुनिया का ये क्या आलम है सूनी आँखें हैं सभी ख़ुशियों से ख़ाली जैसे आओ इन आँखों में ख़ुशियों की चमक हम लिख दें ये ज

Javed Akhtar

Ghazal

क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क

Javed Akhtar

ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत

Jaun Elia

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तुगू क्या है न शो'ले में ये करिश्मा न बर्क़ में ये अदा कोई बताओ कि वो शोख़-ए-तुंद-ख़ू क्या है ये रश्क है कि वो होता ह

Mirza Ghalib

कोई उम्मीद बर नहीं आती कोई सूरत नज़र नहीं आती मौत का एक दिन मुअय्यन है नींद क्यूँँ रात भर नहीं आती आगे आती थी हाल-ए-दिल पे हँसी अब किसी बात पर नहीं आती जानता हूँ सवाब-ए-ताअत-ओ-ज़ोहद पर तबीअत इधर नह

Mirza Ghalib

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता तमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न हो जहाँ उमीद हो इस की वहाँ नहीं मिलता कहाँ चराग़ जलाएँ कहाँ गुलाब रखें छतें तो मिलती ह

Nida Fazli

तुम्हें उस से मोहब्बत है तो हिम्मत क्यूँँ नहीं करते किसी दिन उस के दर पे रक़्स-ए-वहशत क्यूँँ नहीं करते इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते तुम्ह

Farhat Ehsaas

सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता

Nida Fazli

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ कुछ तो मिरे पिंदार-ए-मोहब्बत का भरम रख तू भी तो कभी मुझ को मनाने के लिए आ पहले से मरासिम न सही फिर भी कभी तो रस्म-ओ-रह-

Ahmad Faraz

वो हँस के देखती होती तो उस सेे बात करते कोई उम्मीद भी होती तो उस सेे बात करते हम स्टेशन से बाहर आए इस अफ़सोस के साथ वो लड़की अजनबी होती तो उस सेे बात करते हमारे जाम आधी हौसला-अफ़ज़ाई कर पाए अगर उस न

Charagh Sharma

टूटने पर कोई आए तो फिर ऐसा टूटे कि जिसे देख के हर देखने वाला टूटे अपने बिखरे हुए टुकड़ों को समेटे कब तक एक इंसान की ख़ातिर कोई कितना टूटे कोई टुकड़ा तेरी आँखों में न चुभ जाए कहीं दूर हो जा कि मेरे ख़

Jawwad Sheikh