ghazalKuch Alfaaz

वो हँस के देखती होती तो उस सेे बात करते कोई उम्मीद भी होती तो उस सेे बात करते हम स्टेशन से बाहर आए इस अफ़सोस के साथ वो लड़की अजनबी होती तो उस सेे बात करते हमारे जाम आधी हौसला-अफ़ज़ाई कर पाए अगर उस ने भी पी होती तो उस सेे बात करते हम उस के झुमकों की लरज़िश पे अक्सर सोचते हैं हवा से दोस्ती होती तो उस सेे बात करते ये ख़ामोशी भी क्या है गुफ़्तगू की इंतेहा है कोई बात अनकही होती तो उस सेे बात करते तवज्जोह से बहुत शर्माती है आवाज़ अपनी अगर वो सो रही होती तो उस सेे बात करते किसी से बात करना इतना मुश्किल भी नहीं था किसी ने बात की होती तो उस सेे बात करते

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