रुकें तो धूप से नज़रें बचाते रहते हैं चलें तो कितने दरख़्त आते जाते रहते हैं
Writer
Charagh Sharma
@charagh-sharma
9
Sher
5
Ghazal
1
Nazm
मैं होश-मंद हूँ ख़ुद भी सो मेरी ग़ज़लों में न रक़्स करता है आशिक़ न बाल खींचता है
जो लोग ख़ुद न करते थे होंठों से पान साफ़ पलकों से कर रहे हैं तेरा पायदान साफ़
बनाओ ताजमहल के ब-जाए ताश महल तमाम उम्र मुहब्बत करो गिराओ बनाओ
उँगलियों पर गिने जा सकते हैं अब अच्छे लोग उँगलियों में गर अँगूठे न गिनो भी तो भी
तुझे बहुत शौक़ था मोहब्बत की गर्म लपटों से खेलने का ले जल गई न हथेली अब ख़ुश कहा था मैं ने चराग़ रख दे
इस दिल की ईंट ईंट तेरे बा'द हिल गई तू चल दिया तो इश्क़ की बुनियाद हिल गई
कोई ख़त-वत नहीं फाड़ा कोई तोहफ़ा नहीं तोड़ा कि वो देखे तो ख़ुद सोचे कि दिल तोड़ा, नहीं तोड़ा?
किसी को क्लास से बाहर निकाल रखा है किसी ने सीट पे रुमाल डाल रखा है
नापता हूँ मैं ख़यालात की गहराई को कौन समझेगा मेरी बात की गहराई को
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