रह-गुज़र-ए-ख़याल में दोश-ब-दोश थे जो लोग वक़्त की गर्द-बाद में जाने कहाँ बिखर गए

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Jaun Elia
@jaun-elia
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sherKuch Alfaaz
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मुस्कुराए हम उस से मिलते वक़्त रो न पड़ते अगर ख़ुशी होती
sherKuch Alfaaz
जो रा'नाई निगाहों के लिए सामान-ए-जल्वा है लिबास-ए-मुफ़्लिसी में कितनी बे-क़ीमत नज़र आती
sherKuch Alfaaz
अब जो रिश्तों में बँधा हूँ तो खुला है मुझ पर कब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते
sherKuch Alfaaz
अहद-ए-रफ़ाक़त ठीक है लेकिन मुझ को ऐसा लगता है तुम तो मेरे साथ रहोगी मैं तन्हा रह जाऊँगा
sherKuch Alfaaz
बस यूँँ ही मेरा गाल रखने दे मेरी जान आज गाल पर अपने
sherKuch Alfaaz
जमा हम ने किया है ग़म दिल में इस का अब सूद खाए जाएँगे
sherKuch Alfaaz
अपने अंदर हँसता हूँ मैं और बहुत शरमाता हूँ ख़ून भी थूका सच-मुच थूका और ये सब चालाकी थी
sherKuch Alfaaz
ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी
sherKuch Alfaaz
'जौन' दुनिया की चाकरी कर के तू ने दिल की वो नौकरी क्या की