पता था उस से बिछड़ते ही दोस्त घेरेंगे वही हुआ मुझे रंज-ओ-अलम ने घेर लिया

Writer
Umair Najmi
@umair-najmi
34
19
Sher
15
Ghazal
0
Nazm
3,607 views
sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
नज़र में रखना कहीं कोई ग़म शनास गाहक मुझे सुख़न बेचना है ख़र्चा निकालना है
sherKuch Alfaaz
किताब-ए-इश्क़ में हर आह एक आयत है पर आँसुओं को हुरूफ़-ए-मुक़त्तिआ'त समझ
sherKuch Alfaaz
शब बसर करनी है, महफ़ूज़ ठिकाना है कोई कोई जंगल है यहाँ पास में ? सहरा है कोई ?
sherKuch Alfaaz
तू उस के दिल में जगह चाहता है यार जो शख़्स किसी को देता नहीं अपने साथ वाली जगह
sherKuch Alfaaz
मैं ने मेहनत से हथेली पे लकीरें खींचीं वो जिन्हें कातिब-ए-तक़दीर नहीं खींच सका
sherKuch Alfaaz
मैं किस से पूछूँ ये रस्ता दुरुस्त है कि ग़लत जहाँ से कोई गुज़रता नहीं वहाँ हूँ मैं
sherKuch Alfaaz
यार तस्वीर में तन्हा हूँ मगर लोग मिले कई तस्वीर से पहले कई तस्वीर के बा'द
sherKuch Alfaaz
मैं एक किरदार से बड़ा तंग हूँ क़लमकार मुझे कहानी में डाल ग़ुस्सा निकालना है
sherKuch Alfaaz
मेरे होंटों पे किसी लम्स की ख़्वाहिश है शदीद ऐसा कुछ कर मुझे सिगरेट को जलाना न पड़े