sherKuch Alfaaz
वक़्त ऐसा भी गुज़ारा मैं ने जिस
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@_shades_of_ink_
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Sher
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Ghazal
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Nazm
वक़्त ऐसा भी गुज़ारा मैं ने जिस
तुम सेे बातें करता हूँ जब लगता है तब ज़िंदा हूँ मैं
तुम अपना वक़्त बदलो पर अपनी घड़ी न बदलो तुम
टूटा है इक सपना मेरा कौन है अब अपना मेरा
सबकी आँखों में हवस है उस की आँखों में हया है
कितना मुश्किल था भुलाना तुझ को याद करने के सबब थे कितने
इतने दिन बा'द आई हो मतलब आज तक तुम को याद भी था मैं
बंद कमरे में अकेले रोना जिस्म धरती पे बिछा के सोना
आ जो गया हूँ तुम्हारी गली में आके मुझे तुम गले से लगा लो
तेरी नफ़ासत से गुज़ारिश है मिरी ऐसी ही तू रहना ये ख़्वाहिश है मिरी