sherKuch Alfaaz
उन को लगता है सब तमाशा है वो मोहब्बत जो बे-तहाशा है
Writer profile
1
Sher
0
Ghazal
0
Nazm
Views: 3
उन को लगता है सब तमाशा है वो मोहब्बत जो बे-तहाशा है
ख़ुद के जो काम आ नहीं सकते मेरे क्या ख़ाक काम आएँगे
ज़रा मेरा अक़ीदा मुख्तलिफ़ है तभी तुम दूर हम सेे जा रहे हो
नींद की अब गोलियाँ खाने लगे छोड़कर दुनिया को हम जाने लगे
मोहब्बत में लिया था लोन मैं ने वही किश्तें मुसलसल भर रहा हूँ
मतलबी लोग मतलबी दुनिया अपने ही बोझ में दबी दुनिया
मैं अकेला नहीं हूँ कमरे में साथ रहती है मेरे तन्हाई
ख़्वाब मरते नहीं बिखर जाते तुम न मिलते तो यार मर जाते
जिसे तुम ढूँढती रहती हो मुझ में
जहाँ पर छोड़कर सब जा चुके थे वहाँ तेरा सहारा चाहिए था