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ज़रा सी अपनी बात नहीं मिलने पे तुम यूँँ रूठे हो जैसे उलफ़त थी ही नहीं
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ज़रा सी अपनी बात नहीं मिलने पे तुम यूँँ रूठे हो जैसे उलफ़त थी ही नहीं
ये मत सोचो केवल मैं हूँ इस दुनिया में सब ही दुखी हैं
उस के लिए तुम हम से भी लड़ जाते हो और कहते हो वो मेरा कुछ लगता नहीं
उसे मुझ को अपना बनाने की ख़ातिर ज़मीं आसमाँ एक करना पड़ेगा
उन सेे जा के कर न लेना दोस्ती इक हादसा है मत करो तुम कहना मानो दिल-लगी इक हादसा है
तुम्हें खोने का डर कुछ इस तरह सीने में कहता है चले जाओगे जिस दिन तुम धड़कना छोड़ दूँगा मैं
तुम्हीं से दिल-लगी है आशिक़ी है ज़िंदगी भी है मगर फिर भी तुम्हें पाना फ़क़त इक ख़्वाब जैसा है
तुम्हें है क्या लेना देना अंबर पागल है तो है
तुम्हें चाहिए थी बदन की महक हमारे लिए प्यार कुछ और है
तुम्हें बस देख ही सकते हैं हम हमारी हैसियत जो है सो है