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ये वजूद-ए-इश्क़ तुझ को रब मिटाना ही पड़ेगा हुस्न के हाथों वफ़ा होता है रुस्वा देख हर पल
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ये वजूद-ए-इश्क़ तुझ को रब मिटाना ही पड़ेगा हुस्न के हाथों वफ़ा होता है रुस्वा देख हर पल
ये पहेली अज़ल से उलझी है है बुरा हुस्न या है इश्क़ बुरा
ये इश्क़ भी तो है रोलेट ऐक्ट सा जिस में
वो गिरफ़्तार जो करे तो फिर गेसुओं के क़फ़स में मर जाए
वगरना इश्क़ से मैं तो किया करता था नफ़रत कहानी में ज़बरदस्ती मुझे डाला गया है
उस के झूठे इश्क़ को कर लेता मैं तस्लीम लेकिन उस का लहजा और इरादा बे-वफ़ाई से भरा था
उस को होता है हर इक रोज़ नए शख़्स से इश्क़ उस के इस शौक़ पे अब ख़ाक है हैराँ होना
उम्र सारी लगा दो नाप न पाओगे कभी है जो ये इश्क़ मेरा ला-मुतनाही ठहरा
उम्र सारी इश्क़ में दी काट अपनी इस लिए कुछ कर न पाया ज़िंदगी में
ठीक है साहिल को साहिल भी बनाया आपने बे-वफ़ाई भी तो की हो ये भी सच है मान लो