ख़ुदा की उस के गले में अजीब क़ुदरत है वो बोलता है तो इक रौशनी सी होती है
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Bashir Badr
@bashir-badr
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sherKuch Alfaaz
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सात संदूक़ों में भर कर दफ़्न कर दो नफ़रतें आज इंसाँ को मोहब्बत की ज़रूरत है बहुत
sherKuch Alfaaz
पत्थर के जिगर वालो ग़म में वो रवानी है ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है
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ये शबनमी लहजा है आहिस्ता ग़ज़ल पढ़ना तितली की कहानी है फूलों की ज़बानी है
sherKuch Alfaaz
चराग़ों को आँखों में महफ़ूज़ रखना बड़ी दूर तक रात ही रात होगी
sherKuch Alfaaz
इसी लिए तो यहाँ अब भी अजनबी हूँ मैं तमाम लोग फ़रिश्ते हैं आदमी हूँ मैं
sherKuch Alfaaz
तुझे भूल जाने की कोशिशें कभी कामयाब न हो सकीं तिरी याद शाख़-ए-गुलाब है जो हवा चली तो लचक गई
sherKuch Alfaaz
दिल की बस्ती पुरानी दिल्ली है जो भी गुज़रा है उस ने लूटा है
sherKuch Alfaaz
मैं ख़ुदा का नाम ले कर पी रहा हूँ दोस्तो ज़हर भी इस में अगर होगा दवा हो जाएगा
sherKuch Alfaaz
सुना है बद्र साहब महफ़िलों की जान होते थे बहुत दिन से वो पत्थर हैं न हँसते हैं न रोते हैं