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वा'दा झूटा कर लिया चलिए तसल्ली हो गई है ज़रा सी बात ख़ुश करना दिल-ए-नाशाद का
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वा'दा झूटा कर लिया चलिए तसल्ली हो गई है ज़रा सी बात ख़ुश करना दिल-ए-नाशाद का
ना-उमीदी बढ़ गई है इस क़दर आरज़ू की आरज़ू होने लगी
मिलाते हो उसी को ख़ाक में जो दिल से मिलता है मेरी जाँ चाहने वाला बड़ी मुश्किल से मिलता है
हाथ रख कर जो वो पूछे दिल-ए-बेताब का हाल हो भी आराम तो कह दूँ मुझे आराम नहीं
फ़क़त नब्ज़ से हाल ज़ाहिर न होगा मेरा दिल भी ऐ चारा-गर देख लेना
आशिक़ी से मिलेगा ऐ ज़ाहिद बंदगी से ख़ुदा नहीं मिलता
रहा न दिल में वो बे-दर्द और दर्द रहा मुक़ीम कौन हुआ है मक़ाम किस का था
ख़ुदा रक्खे मोहब्बत ने किए आबाद दोनों घर मैं उन के दिल में रहता हूँ वो मेरे दिल में रहते हैं
आइना देख के कहते हैं सँवरने वाले आज बे-मौत मरेंगे मिरे मरने वाले
लिपट जाते हैं वो बिजली के डर से इलाही ये घटा दो दिन तो बरसे