sherKuch Alfaaz
मेरी पहली नज़र लौटा दे मुझ को तेरी जानिब दुबारा देखना है
Writer
@fahmi-badayuni
19
Sher
5
Ghazal
0
Nazm
मेरी पहली नज़र लौटा दे मुझ को तेरी जानिब दुबारा देखना है
कमरा खोला तो आँख भर आई ये जो ख़ुशबू है जिस्म थी पहले
जो मोहब्बत लुटाया करते थे वो तराज़ू ख़रीद लाए हैं
तसल्ली दे रहे हैं चारा-गर को समझ लो हाल है कैसा हमारा
जब तलक क़ुव्वत-ए-तख़य्युल है आप पहलू से उठ नहीं सकते
उसे ले कर जो गाड़ी जा चुकी है मैं शायद उस के नीचे आ रहा हूँ
अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ
आज पैवंद की ज़रूरत है ये सज़ा है रफ़ू न करने की
आप तशरीफ़ लाए थे इक रोज़ दूसरे रोज़ ए'तिबार हुआ
बदन का ज़िक्र बातिल है तो आओ बिना सर पैर की बातें करेंगे