वो इंतिक़ाम की आतिश थी मेरे सीने में मिला न कोई तो ख़ुद को पछाड़ आया हूँ
Jamal Ehsani
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sherKuch Alfaaz
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न वो हसीन न मैं ख़ूब-रू मगर इक साथ हमें जो देख ले वो देखता ही रह जाए
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आँखों से अब वो ख़्वाब को निस्बत नहीं रही इक उम्र हो गई ये समुंदर ख़राब है
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आगाह मैं चराग़ जलाते ही हो गया दुनिया मिरे हिसाब से बढ़ कर ख़राब है
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उस की नज़र बदलने से पहले की बात है मैं आसमान पर था सितारा ज़मीन पर
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उस ने बारिश में भी खिड़की खोल के देखा नहीं भीगने वालों को कल क्या क्या परेशानी हुई
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ख़ुद जिसे मेहनत मशक़्क़त से बनाता हूँ 'जमाल' छोड़ देता हूँ वो रस्ता आम हो जाने के बा'द
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ये ग़म नहीं है कि हम दोनों एक हो न सके ये रंज है कि कोई दरमियान में भी न था
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रात सोने के लिए दिन काम करने के लिए वक़्त मिलता ही नहीं आराम करने के लिए
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याद रखना ही मोहब्बत में नहीं है सब कुछ भूल जाना भी बड़ी बात हुआ करती है