sherKuch Alfaaz
उस की फ़ितरत में न था तर्क-ए-त'अल्लुक़ लेकिन दूसरे शख़्स को इस नहज पे पहुँचा देना

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@jawwad-sheikh
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उस की फ़ितरत में न था तर्क-ए-त'अल्लुक़ लेकिन दूसरे शख़्स को इस नहज पे पहुँचा देना
किसी के सर्द रवय्ये पे ख़ामुशी का लिहाफ़ ये इंतिक़ाम भी क्या इंतिक़ाम होता है
मैं ऐसी उम्र से दुख झेलने लगा 'जव्वाद' जो आम तौर पे होती है खेलने वाली
लग रहा है ये नर्म लहजे से फिर तुझे कोई मसअला हुआ है
ख़ुद को मसरूफ़ किए रखने की कोशिश करना क्या तेरी याद के ज़ुमरे में नहीं आता है
तुम अगर सीखना चाहो मुझे बतला देना आम सा फ़न तो कोई है नहीं तोहफ़ा देना
सब को बचाओ ख़ुद भी बचो फ़ासला रखो अब और कुछ करो न करो फ़ासला रखो
टूटने पर कोई आए तो फिर ऐसा टूटे कि जिसे देख के हर देखने वाला टूटे
मैं चाहता हूँ मोहब्बत मुझे फ़ना कर दे फ़ना भी ऐसा कि जिस की कोई मिसाल न हो
मैं इस ख़याल से जाते हुए उसे न मिला कि रोक लें न कहीं सामने खड़े आँसू