sherKuch Alfaaz
मिला था जिस बग़ीचे में वो अब शमशान लगता है मुहब्बत ने ये कैसे दिन दिखाए हैं मुहब्बत में

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@kaifiyat_e_kalam__786
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Nazm
मिला था जिस बग़ीचे में वो अब शमशान लगता है मुहब्बत ने ये कैसे दिन दिखाए हैं मुहब्बत में
मौत से मिलना है मुझ को पूछना है इक पता वो पता जो मौत भी देने में शर्मा जाएगी
है जन्नत में सारी ही नेमत ख़ुदा की मुझे भी बताओ ये जन्नत कहाँ है
यहाँ अब कौन दिल का कायल है ,बता हाँ कुछ लिबास होते तो कुछ बात थी
यार तेरी चीज़ सब हम ने हटा दी इस नज़र से फेंक आया वो घड़ी भी जो कि लाई थी शहर से
यार अब तो काफ़ी ज़्यादा सज गई हो फिर भी तुम को हम पुरानी लिख रहे हैं
तुम ने जिन-जिन को सताया है किधर जाएँगे तेरे साए भी सताएँगे, जिधर जाएँगे
तेरे ख़ातिर जहाँ डूबा वो दरिया भी किनारा था
तेरे दिल की इक ये बस्ती, पहले उस इक राजा की थी जिस ने तेरे नाम पर, जंगें भी बे-अंदाज़ा की थी
"शहीद-ए-आज़म भगतसिंह" आँखों में वो आँसू नहीं