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ज़िन्दगी ले रही मज़े मेरी मैं मज़े ज़िन्दगी के ले रहा हूँ
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ज़िन्दगी ले रही मज़े मेरी मैं मज़े ज़िन्दगी के ले रहा हूँ
ज़िन्दगी क़र्ज़ की तेरी साँसें सूद के साथ मैं चुका दूँगा
ज़िंदगी गुदगुदी के जैसी है आप रोने लगोगे हँसते हुए
ज़िन्दगी मुश्किल बहुत है आप हैं हासिल बहुत है
ज़िंदगी भेदभाव करती है मौत सबके लिए बराबर है
ज़रा सी बात है मैं ने किसी को हीर माना है ज़माने भर ने मुझ को क़ाबिल-ए-ताज़ीर माना है
ज़ख़्म भरने से एक डर भी है इश्क़ की लज़्ज़तें न खो दूँ मैं
यूँँ न सब को सलाम करने से काम बनता है काम करने से
यूँंँ तो है दिन में अलग सबका वजूद रात में परछाइयाँ मिल जाती हैं
ये दिल कमबख़्त भी आया उसी पर मैं जिस को मुँह लगाता भी नहीं था