ये सदा-ए-ग़ैब और फिर ये सदा-ए-दिल "अमन" हो सके क़ाफ़िर न हम तो हो सके ज़ाहिद यहाँ
Writer
Aman Kumar Shaw "Haif"
@shawaman56
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sherKuch Alfaaz
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वुसअते सहरा भी कम पड़ जाएगी इक दिन "अमन" इस कदर आवारगी बढ़ती रही गर आप की
sherKuch Alfaaz
तन छुपाऊँ मन छुपाऊँ क्या करूँँ दर्पण छुपाऊँ हो रहा ज़ाहिर तू सब सेे कैसे ये जीवन छुपाऊँ
sherKuch Alfaaz
रौनके महफ़िल से ले कर इस सुकूत-ए-मर्ग तक ज़िन्दगी तुझ को लिए हम दर-ब-दर फिरते रहे
sherKuch Alfaaz
मौसम-ए-ज़िंदान बदले तो क़फ़स गुलज़ार हो क़ैदखाने को बदल कर लाभ कुछ होगा नहीं
sherKuch Alfaaz
हैफ़ सद हैफ़ मौत आएगी हैफ़ सद हैफ़ मर चुका हूँ मैं
sherKuch Alfaaz
छोड़िये मैं कौन हूँ क्या लगता हूँ मैं आप का शे'र जो अच्छा लगे तो दीजिये बस दाद आप
sherKuch Alfaaz
ब-मुश्किल वक़्त तो कट जाएगा तेरे बा'द भी हमदम ज़रा सोचो मगर इस ज़िन्दगी का हाल क्या होगा
sherKuch Alfaaz
आरज़ी थी ज़िन्दगी और दर्द पैहम थे मेरे दर्द को हम करते कम या ज़िन्दगी को देखते
sherKuch Alfaaz
पाँव के छालों से पूछो ये सफ़र कैसा रहा मंज़िलों को क्या पता दुशवारियाँ कितनी मिली