sherKuch Alfaaz
ज़िंदगी से चली गई लेकिन वो मेरे ज़ेहन से नहीं जाती
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Sher
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Ghazal
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Nazm
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ज़िंदगी से चली गई लेकिन वो मेरे ज़ेहन से नहीं जाती
ज़हरस इतने तो नहीं मरते लोग मरते हैं जितने तानों से
ये सादगी ये हुस्न ये लहजा तेरा कैसे मेरा दिल तेरा दीवाना न हो
ये कहानी भी मुकम्मल हो न पाई दोस्तो इस कहानी में भी उस का दिल कोई और ले गया
ये जगह उतनी भी नहीं बदली जितनी जानाँ बदल गई हो तुम
वो मुझे तंग कर नहीं सकते उन को ये बात तंग करती है
उस की तस्वीर से करते हैं बात ऑनलाइन वो नहीं होती जब
उस के कहने से सुधर सकता हूँ डरती है जो मुझे कुछ कहने से
उस का क्यूँँ इंतिज़ार करता मैं उस के वादे तो महज़ वादे थे
तू मुसलमान और हिंदू बन मैं तो इंसान बनने आया हूँ