इक अव्वल दर्जे का पाक इक माहिर है मन तो तुझ में रमता है दिल काफ़िर फिर है
Writer
Vikram Gaur Vairagi
@vikram-vairagi
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Sher
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Ghazal
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
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कूज़ा-गर मिल गया तो पूछूँगा मेरी मिट्टी कहाँ से लाया था
sherKuch Alfaaz
टूटी चीज़ों को बदल दें था बेहतर वरना तू जो चाहता तो दोबारा बना लेता हमें
sherKuch Alfaaz
टूटी चीज़ों को बदल देना था बेहतर वरना तू अगर चाहता दोबारा बना लेता हमें
sherKuch Alfaaz
यूँँ बे-तरतीब ज़ख़्मों ने बताया राज़ क़ातिल का सलीक़े से जो मेरा क़त्ल गर होता तो क्या होता
sherKuch Alfaaz
बग़ैर चश्में के जो देख भी न पाता है वो बेवक़ूफ़ मुझे देखना सिखाता है
sherKuch Alfaaz
मैं अपनी हिजरत का हाल लगभग बता चुका था सभी को और बस तिरे मोहल्ले के सारे लड़के हवा बनाने में लग गए थे
sherKuch Alfaaz
प्यार मुहब्बत बा'द की बातें जान कभी ये सोचा है किस ने तेरा साथ दिया था कौन नशे में ख़त्म हुआ
sherKuch Alfaaz
कुछ रिश्तों में दिल को आज़ादी नइँ होती कुछ कमरों में रौशनदान नहीं होता है
sherKuch Alfaaz
हैरान हो के देख रहे हैं मुझे अज़ाब मैं मर रहा हूँ और बहुत इत्मीनान से