nazmKuch Alfaaz

"कब" कब ये पेड़ हरे होंगे फिर से कब ये कलियाँ फूटेंगी और ये फूल हसेंगे कब ये झरने अपनी प्यास भरेंगे कब ये नदियाँ शोर मचाएँगी कब ये आज़ाद किए जाएँगे सब पंछी कब जंगल साँसे लेंगे कब सब जाएँगे अपने घर कब हाथों से ज़ंजीरें खोली जाएँगी कब हम ऐसों को पूछेगा कोई और ये फ़क़ीरों को भी क़िस्से में लाया जाएगा कब इन काँटों की भी क़ीमत होगी और मिट्टी सोने के भाव में आएगी कब लोगों की ग़लती टाली जाएगी कब ये हवाएँ पायल पहने झूमेगी कब अंबर से परियाँ उतरेंगी कब पत्थरों से भी ख़ुशबू आएगी कब हंसों के जोड़ें नदियों पे बैठेंगे बरखा गीत बनाएगी और मोर उठा के पर कत्थक करते देखे जाएँगे नीलकमल पानी से इश्क़ लड़ाएंगे मछलियाँ ख़ुशी के गोते मारेंगी कब कोयल की कूक सुनाई देगी कब भॅंवरे फिर गुन- गुन करते लौटेंगे बागों में और कब ये प्यारी तितलियाँ कलर फेकेंगी फिर सब कुछ डूबा होगा रंगों में कब ये दुनिया रौशन होगी कब ये जुगनू अपने रंग में आएँगे कब ये सब मुमकिन है कब सबके ही सपने पूरे होंगे कब अपने मन के मुताबिक़ होगा सब कुछ कब ये बहारें लोटेंगी कब वो तारीख़ आएगी बस मुझ को ही नहीं सब को इंतिज़ार है तेरे ' बर्थडे ' का

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ا سے سے محبت جھیلیں کیا ہیں ا سے کی آنکھیں عمدہ کیا ہے ا سے کا چہرہ خوشبو کیا ہے ا سے کی سانسیں خوشیاں کیا ہیں ا سے کا ہونا تو غم کیا ہے ا سے سے جدائی ساون کیا ہے ا سے کا رونا سر گرا کیا ہے ا سے کی اداسی گرمی کیا ہے ا سے کا غصہ اور بہاریں ا سے کا ہنسنا میٹھا کیا ہے ا سے کی باتیں کڑوا کیا ہے مری باتیں کیا پڑھنا ہے ا سے کا لکھا کیا سننا ہے ا سے کی غزلیں لب کی خواہش ا سے کا ماتھا زخم کی خواہش ا سے کا چھونا دنیا کیا ہے اک جنگل ہے اور جاناں کیا ہوں پیڑ سمجھ لو اور حقیقت کیا ہے اک راہی ہے کیا سوچا ہے ا سے سے محبت کیا کرتے ہوں ا سے سے محبت زار پیشہ ا سے سے محبت ا سے کے علاوہ ا سے سے محبت ا سے سے محبت

Varun Anand

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"हम मिलेंगे कहीं" हम मिलेंगे कहीं अजनबी शहर की ख़्वाब होती हुई शाहराओं पे और शाहराओं पे फैली हुई धूप में एक दिन हम कहीं साथ होगे वक़्त की आँधियों से अटी साहतों पर से मिट्टी हटाते हुए एक ही जैसे आँसू बहाते हुए हम मिलेंगे घने जंगलो की हरी घास पर और किसी शाख़-ए-नाज़ुक पर पड़ते हुए बोझ की दास्तानों में खो जाएँगे हम सनोबर के पेड़ों की नोकीले पत्तों से सदियों से सोए हुए देवताओं की आँखें चभो जाएँगे हम मिलेंगे कहीं बर्फ़ के बाजुओं में घिरे पर्वतों पर बाँझ क़ब्रो में लेटे हुए कोह पेमाओं की याद में नज़्म कहते हुए जो पहाड़ों की औलाद थे, और उन्हें वक़्त आने पर माँ बाप ने अपनी आग़ोश में ले लिया हम मिलेंगे कही शाह सुलेमान के उर्स में हौज़ की सीढियों पर वज़ू करने वालो के शफ़्फ़ाफ़ चेहरों के आगे संगेमरमर से आरस्ता फ़र्श पर पैर रखते हुए आह भरते हुए और दरख़्तों को मन्नत के धागो से आज़ाद करते हुए हम मिलेंगे हम मिलेंगे कहीं नार मेंडी के साहिल पे आते हुए अपने गुम गश्तरश्तो की ख़ाक-ए-सफ़र से अटी वर्दियों के निशाँ देख कर मराकिस से पलटे हुए एक जर्नेल की आख़िरी बात पर मुस्कुराते हुए इक जहाँ जंग की चोट खाते हुए हम मिलेंगे हम मिलेंगे कहीं रूस की दास्ताओं की झूठी कहानी पे आँखों में हैरत सजाए हुए, शाम लेबनान बेरूत की नरगिसी चश्मूरों की आमद के नोहू पे हँसते हुए, ख़ूनी कज़ियो से मफ़लूह जलबानियाँ के पहाड़ी इलाक़ों में मेहमान बन कर मिलेंगे हम मिलेंगे एक मुर्दा ज़माने की ख़ुश रंग तहज़ीब में ज़स्ब होने के इमकान में इक पुरानी इमारत के पहलू में उजड़े हुए लाँन में और अपने असीरों की राह देखते पाँच सदियों से वीरान ज़िंदान में हम मिलेंगे तमन्नाओं की छतरियों के तले, ख़्वाहिशों की हवाओं के बेबाक बोसो से छलनी बदन सौंपने के लिए रास्तों को हम मिलेंगे ज़मीं से नमूदार होते हुए आठवें बर्रे आज़म में उड़ते हुए कालीन पर हम मिलेंगे किसी बार में अपनी बकाया बची उम्र की पायमाली के जाम हाथ में लेंगे और एक ही घूंट में हम ये सैयाल अंदर उतारेंगे और होश आने तलक गीत गायेंगे बचपन के क़िस्से सुनाता हुआ गीत जो आज भी हम को अज़बर है बेड़ी बे बेड़ी तू ठिलदी तपईये पते पार क्या है पते पार क्या है? हम मिलेंगे बाग़ में, गाँव में, धूप में, छाँव में, रेत में, दश्त में, शहर में, मस्जिदों में, कलीसो में, मंदिर में, मेहराब में, चर्च में, मूसलाधार बारिश में, बाज़ार में, ख़्वाब में, आग में, गहरे पानी में, गलियों में, जंगल में और आसमानों में कोनो मकाँ से परे गैर आबद सैयाराए आरज़ू में सदियों से ख़ाली पड़ी बेंच पर जहाँ मौत भी हम से दस्तो गरेबाँ होगी, तो बस एक दो दिन की मेहमान होगी

Tehzeeb Hafi

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''चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ'' चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ जो लफ़्ज़ कहूँ वो हो जाए बस अश्क कहूँ तो एक आँसू तेरे गोरे गाल को धो जाए मैं आ लिक्खूँ तू आ जाए मैं बैठ लिक्खूँ तू आ बैठे मेरे शाने पर सर रक्खे तू मैं नींद कहूँ तू सो जाए मैं काग़ज़ पर तेरे होंठ लिक्खूँ तेरे होंठों पर मुस्कान आए मैं दिल लिक्खूँ तू दिल था में मैं गुम लिक्खूँ वो खो जाए तेरे हाथ बनाऊँ पेंसिल से फिर हाथ पे तेरे हाथ रखूँ कुछ उल्टा सीधा फ़र्ज़ करूँँ कुछ सीधा उल्टा हो जाए मैं आह लिखूँ तू हाए करे बेचैन लिखूँ बेचैन हो तू फिर बेचैन का बे काटूँ तुझे चैन ज़रा सा हो जाए अभी ऐन लिखूँ तू सोचे मुझे फिर शीन लिखूँ तेरी नींद उड़े जब क़ाफ़ लिखूँ तुझे कुछ कुछ हो मैं इश्क़ लिखूँ तुझे हो जाए

Amir Ameer

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یاد ہے پہلے روز کہا تھا یاد ہے پہلے روز کہا تھا پھروں نہ کہنا غلطی دل کی پیار سمجھ کے کرنا لڑکی پیار نبھانا ہوتا ہے پھروں پار لگانا ہوتا ہے یاد ہے پہلے روز کہا تھا ساتھ چلو تو پورے سفر تک مر جانے کی اگلی خبر تک سمجھو یار خدا تک ہوگا سارا پیار وفا تک ہوگا پھروں یہ بندھن توڑ نہ جانا چھوڑ گئے تو پھروں نہ آنا چھوڑ دیا جو تیرا نہیں ہے چلا گیا جو میرا نہیں ہے یاد ہے پہلے روز کہا تھا یا تو ٹوٹ کے پیار نہ کرنا یا پھروں پیٹھ پہ وار نہ کرنا جب نادانی ہو جاتی ہے نئی کہانی ہو جاتی ہے نئی کہانی لکھ لاوں گا اگلے روز میں بک جاؤں گا تیرے گل جب کھیل جائیں گے مجھ کو پیسے مل جائیں گے یاد ہے پہلے روز کہا تھا بچھڑ گئے تو موج اڑانا واپس میرے پاس نہ آنا جب کوئی جا کر واپس آئے روئے تڑپے یا پچھتائے میں پھروں اس کو ملتا نہیں ہوں ساتھ دوبارہ چلتا نہیں ہوں گم جاتا ہوں کھو جاتا ہوں میں پتھر کا ہو جاتا ہوں

Khalil Ur Rehman Qamar

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مرشد مرشد پلیز آج مجھے سمے دیجئے مرشد ہے وہ ہے وہ آج آپ کو دکھڑے سناؤںگا مرشد ہمارے ساتھ بڑا ظلم ہوں گیا تو مرشد ہمارے دیش ہے وہ ہے وہ اک جنگ چھڑ گئی مرشد سبھی غنیم شرافت سے مر گئے مرشد ہمارے ذہن گرفتار ہوں گئے مرشد ہماری سوچ بھی بازاری ہوں گئی مرشد ہماری فوج کیا لڑتی حریف سے مرشد اسے تو ہم سے ہی فرصت نہیں ملی مرشد بے حد سے مار کے ہم خود بھی مر گئے مرشد ہ ہے وہ ہے وہ ہے وہ جرح نہیں تلوار دی گئی مرشد ہماری ذات پہ بہتان چڑھ گئے مرشد ہماری ذات پلاندوں ہے وہ ہے وہ دب گئی مرشد ہمارے واسطے ب سے ایک بے وجہ تھا مرشد حقیقت ایک بے وجہ بھی تقدیر لے اڑی مرشد خدا کی ذات پہ اندھا یقین تھا افسو سے اب یقین بھی اندھا نہیں رہا مرشد محبتوں کے نتائج ک ہاں گئے مرشد مری تو زندگی برباد ہوں گئی مرشد ہمارے گاؤں کے بچوں نے بھی کہا مرشد کوں آخہ آ کے صدا حال دیکھ وجہ مرشد ہمارا کوئی نہیں ایک آپ ہیں یہ ہے وہ ہے وہ بھی جانتا ہوں کے اچھا نہیں ہوا مرشد ہے وہ ہے وہ جل رہا ہوں ہوائیں لگ دیجئے مرشد ازالہ کیجیے دعائیں لگ دیجئے مرشد خاموش رہ

Afkar Alvi

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"ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर" सोच नहीं सकता था मैं इक रंग मेरे सब होश उड़ा सकता है सोच नहीं सकता था ख़ुदा किसी को इतना भी हसीन बना सकता है दोस्त तेरी तस्वीर को देख लगा है कुछ यूँँ जैसे चंदा रात को झील में अपना अक्स बना दे और धीरे-धीरे उस में चलने लग जाए फिर रुक जाए और हसने लग जाए तेरी ही तस्वीर से ऐसा ख़याल आया है दुनिया गर ब्लैक एंड व्हाइट ही, होती तो कुछ ख़ास हसीन, ये होती ये बस इक तस्वीर नहीं है एक अलग सी बात है इस में वो जो शायद कहीं नहीं है जो इन फूलों के रंगों में नहीं हैं जो जंगल में नहीं है जो शहरों में नहीं है जो महलों में नहीं है ये वो है जो अब तक देखा नहीं है तेरी ये तस्वीर वो जादू है जिस को दिखा कर जादूगरों ने सब को हैरत में डाला हुआ है दोस्त ज़ुल्फ़ तेरी नागिन है लब दरिया में रक्खे उन सीपी के जैसे हैं जो खुल जाए तो बस मोती ही मोती चेहरा भोला है आँखें बिजली हैं कोई परी है तू कहने को लड़की है हाए नज़र न तुझे लग जाए कोई यार तू इतनी हसीन है तू शाइ'र का दीन है तू कितनो का यक़ीन है गर अपनी तस्वीर तू खोल दे तो फिर तेरे दिलबर इतने हो जाएँगे लोग ख़ुदा को छोड़ तेरे ही पास चले आएँगे तेरी इक तस्वीर से जंग कराई जा सकती तेरी इक तस्वीर से एक अलग कोई दुनिया बनाई जा सकती है ये बस ब्लैक एंड व्हाइट रंग में इक तस्वीर नहीं है तू ये पूछ कि क्या ये नहीं है ? जिस की काट नहीं हो ऐसी हक़ीक़त है ये सबके ख़ुदा की ज़ियारत है ये भटके हुए को सुकूनत है ये मिल के सब अच्छा हो जैसे क़िस्मत है ये जिस के बगैर अदीब नहीं हो शाइ'र की वो ज़रूरत है ये ख़ुद में से'आदत है ये मुझ को सरवत है ये भोली शरारत है ये पाक मोहब्बत है ये सारी आयत है ये सारी रहमत है ये सब के दिल पे हुकूमत ये है इस शाइ'र की रंगत है ये ये बस इक तस्वीर नहीं है

BR SUDHAKAR

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हम दोनो घर चल देंगे हाथ पकड़ कर रख मेरा सर सीने पर रख मेरा यक़ीन तू कर, तू कहीं जाने वाला नहीं है वेंटिलेटर कम पड़ जाए तो क्या ? अपने हाथों को वेंटिलेटर, मैं बना दूँगा मैं तेरी सांसो की ख़ातिर सच में सनम मैं अपनी सांसे तक गिरवी रख दूँगा मैं रब से झगड़ा कर लूंगा पर कैसे भी मैं तुझ को जाने नहीं दूँगा तू घबरा मत सब कुछ ठीक हो जाएगा जैसे पहले था सब वैसा हो जाएगा तू रो मत इतनी सी तो बात है, और इतना कुछ तो हम ने साथ में झेला है और फिर इक दिन ये भी दुख चला जाएगा ऐसा समझो हम एक जंग में है ऐसा जानो हम जीतेंगे बस तू अपना हौसला मत जाने देना बाकी तो तू मुझ पर छोड़ दे सब कुछ मैं हूँ ना !! क्यूँ फिक्र तू करती है ? जैसे कट जाता है हर इक दिन वैसे ये दिन भी कट जाएगा ये अँधेरा धीरे-धीरे हट जाएगा फिर से सहर होगी हमनें कितना कुछ जीना है अभी तो अपना वेट भी करता होगा, घर अपना तेरी बातों में फिर से खोना है मुझे तेरे साथ अभी कितना हँसना है मुझे मैं ने तेरे हाथों का खाना फिर से खाना है तू टेंशन मत रख हम जल्दी ही घर चल देंगे तुझ को कुछ नहीं होगा बस कुछ दिन की बात है फिर हम दोनो घर चल देंगे

BR SUDHAKAR

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دکھ مجھے جو لگا حقیقت نہیں ہوں ہے وہ ہے وہ ہے وہ اب ا سے جگہ تو نہیں ہوں تو اک کال میسج نہیں کر رہی ہے کہ ایسی حقیقت کیا ہی شکایت ہے جو مجھ سے تو کر نہیں پا رہی ہے بتاتی نہیں ہے ستاتی رہی ہے مجھے تو بتا کیوں خفا ہے مجھے تو بتا کیا ہوا ہے تو کچھ بول یہ خموشی کاٹتی ہے مجھے جان لے ب سے یہ آنکھیں کسے روتی ہے ب سے مجھے کس کا دکھ ہے مجھے پوچھ تو پھروں بتاؤں تیرا نام ہے وہ ہے وہ اور تجھے ہے وہ ہے وہ سناؤں دکھاؤں میرا غم مری زخم جو بھر نہیں پا رہے ہیں مجھے تری ایسے ستانے کا دکھ ہے تری لوٹ کے پھروں لگ آنے کا دکھ ہے مری پا سے آ میرا دکھ جان لڑکی سخی کوئی اتنا خفا بھی نہیں ہوتا ہے چنو کہ تو ہے کہ غصہ زیادہ دینو تک نہیں کرنا ہوتا ہے سمجھی اے لڑکی کہ غلطی بھلانے کے خاطر بنی ہے محبت نبھانے کے خاطر بنی ہے کہ جب دوستی کر لی جائے اسے پھروں نبھانا بھی ہوتا ہے لڑکی مجھے یاد ہے تو م گر ہے وہ ہے وہ بھلایا گیا تو ہوں تو بے شک مجھے چھوڑ دے پر ذرا سن کہی بھی کبھی بھی کسی بھی ہاں دریا نے پیاسے کو پیاسا نہیں م

BR SUDHAKAR

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उस का चेहरा सिंपल सादा सा भोला चेहरा है यार क़सम से वो प्यारा चेहरा है पेड़ नदी ये फूल सभी छोड़ो उस को देखो उस का चेहरा है दुनिया लाख हसीन हो सकती है लेकिन उस का चेहरा चेहरा है देख उसे कह डाला हम ने भी बातें प्यारी हैं प्यारा चेहरा है इक तिल होट पे, गाल के नीचे इक और वो चाँद सा नाक पे नूर लिए दो प्यारी आँखें, और सुर्ख़ से लब प्यार मिलाकर अपना रंगों में हम ने बनाया उस का चेहरा है भोली सूरत पे वो अकड़ देखो ग़लती कर के घुमाया चेहरा है रूठ गई जो हम सेे कभी वो दोस्त सब सेे पहले चुराया चेहरा है जब भी उस को चूमने आए हम होट से पहले आया चेहरा है मुँह से इक वो स्वाद नहीं जाता जबसे उस का चूमा चेहरा है रात का होना उस की आँखें हैं दिन का निकलना उस का चेहरा है दुनिया में है उस के चेहरे से है नूर रौशनी लाया उस का चेहरा है हम जैसे भी दरिया करेंगे पार ! अब जो सहारा उस का चेहरा है हम आबाद रहेंगे ऐसे ही हम पे गर साया वो चेहरा है वो चेहरा है बस वो चेहरा है हम को बस वो चेहरा चेहरा है हम ने चाहा बस वो चेहरा है हम ने माँगा बस वो चेहरा है हम ने देखा भी तो वो चेहरा हम ने सोचा बस वो चेहरा है

BR SUDHAKAR

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