"ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर" सोच नहीं सकता था मैं इक रंग मेरे सब होश उड़ा सकता है सोच नहीं सकता था ख़ुदा किसी को इतना भी हसीन बना सकता है दोस्त तेरी तस्वीर को देख लगा है कुछ यूँँ जैसे चंदा रात को झील में अपना अक्स बना दे और धीरे-धीरे उस में चलने लग जाए फिर रुक जाए और हसने लग जाए तेरी ही तस्वीर से ऐसा ख़याल आया है दुनिया गर ब्लैक एंड व्हाइट ही, होती तो कुछ ख़ास हसीन, ये होती ये बस इक तस्वीर नहीं है एक अलग सी बात है इस में वो जो शायद कहीं नहीं है जो इन फूलों के रंगों में नहीं हैं जो जंगल में नहीं है जो शहरों में नहीं है जो महलों में नहीं है ये वो है जो अब तक देखा नहीं है तेरी ये तस्वीर वो जादू है जिस को दिखा कर जादूगरों ने सब को हैरत में डाला हुआ है दोस्त ज़ुल्फ़ तेरी नागिन है लब दरिया में रक्खे उन सीपी के जैसे हैं जो खुल जाए तो बस मोती ही मोती चेहरा भोला है आँखें बिजली हैं कोई परी है तू कहने को लड़की है हाए नज़र न तुझे लग जाए कोई यार तू इतनी हसीन है तू शाइ'र का दीन है तू कितनो का यक़ीन है गर अपनी तस्वीर तू खोल दे तो फिर तेरे दिलबर इतने हो जाएँगे लोग ख़ुदा को छोड़ तेरे ही पास चले आएँगे तेरी इक तस्वीर से जंग कराई जा सकती तेरी इक तस्वीर से एक अलग कोई दुनिया बनाई जा सकती है ये बस ब्लैक एंड व्हाइट रंग में इक तस्वीर नहीं है तू ये पूछ कि क्या ये नहीं है ? जिस की काट नहीं हो ऐसी हक़ीक़त है ये सबके ख़ुदा की ज़ियारत है ये भटके हुए को सुकूनत है ये मिल के सब अच्छा हो जैसे क़िस्मत है ये जिस के बगैर अदीब नहीं हो शाइ'र की वो ज़रूरत है ये ख़ुद में से'आदत है ये मुझ को सरवत है ये भोली शरारत है ये पाक मोहब्बत है ये सारी आयत है ये सारी रहमत है ये सब के दिल पे हुकूमत ये है इस शाइ'र की रंगत है ये ये बस इक तस्वीर नहीं है
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مرشد مرشد پلیز آج مجھے سمے دیجئے مرشد ہے وہ ہے وہ آج آپ کو دکھڑے سناؤںگا مرشد ہمارے ساتھ بڑا ظلم ہوں گیا تو مرشد ہمارے دیش ہے وہ ہے وہ اک جنگ چھڑ گئی مرشد سبھی غنیم شرافت سے مر گئے مرشد ہمارے ذہن گرفتار ہوں گئے مرشد ہماری سوچ بھی بازاری ہوں گئی مرشد ہماری فوج کیا لڑتی حریف سے مرشد اسے تو ہم سے ہی فرصت نہیں ملی مرشد بے حد سے مار کے ہم خود بھی مر گئے مرشد ہ ہے وہ ہے وہ ہے وہ جرح نہیں تلوار دی گئی مرشد ہماری ذات پہ بہتان چڑھ گئے مرشد ہماری ذات پلاندوں ہے وہ ہے وہ دب گئی مرشد ہمارے واسطے ب سے ایک بے وجہ تھا مرشد حقیقت ایک بے وجہ بھی تقدیر لے اڑی مرشد خدا کی ذات پہ اندھا یقین تھا افسو سے اب یقین بھی اندھا نہیں رہا مرشد محبتوں کے نتائج ک ہاں گئے مرشد مری تو زندگی برباد ہوں گئی مرشد ہمارے گاؤں کے بچوں نے بھی کہا مرشد کوں آخہ آ کے صدا حال دیکھ وجہ مرشد ہمارا کوئی نہیں ایک آپ ہیں یہ ہے وہ ہے وہ بھی جانتا ہوں کے اچھا نہیں ہوا مرشد ہے وہ ہے وہ جل رہا ہوں ہوائیں لگ دیجئے مرشد ازالہ کیجیے دعائیں لگ دیجئے مرشد خاموش رہ
Afkar Alvi
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तुम हमारे लिए तुम हमारे लिए अर्चना बन गई हम तुम्हारे लिए एक दर्पण प्रिये तुम मिलो तो सही हाल पूछो मेरा हम न रो दें तो कह देना पत्थर प्रिये प्यार मिलना नहीं था अगर भाग्य में देवताओं ने हम सेे ये छल क्यूँ किया मेरे दिल में भरी रेत ही रेत थी दे के अमृत ये हम को विकल क्यूँ किया अप्सरा हो तो हो पर हमारे लिए तुम ही सुंदर सुकोमल सुघर हो प्रिये देवताओं के गणितीय संसार में ऐसा भी है नहीं कोई अच्छा न था हम अगर इस जनम भी नहीं मिल सके सब कहेंगे यही प्यार सच्चा न था कायरों को कभी प्यार मिलता नहीं फ़ैसला कोई ले लो कि डटकर प्रिये मम्मी कहती थीं चंदा बहुत दूर है चाँद से आगे हम को सितारा लगा यूँँ तो चेहरे ही चेहरे थे दुनिया में पर एक तेरा ही चेहरा पियारा लगा पलकों पे मेरी रख कर क़दम तुम चलो पॉंव में चुभ न जाए कि कंकड़ प्रिये
Rakesh Mahadiuree
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مری زخم نہیں بھرتے یاروں مری ناخون بڑھتے جاتے ہیں ہے وہ ہے وہ ہے وہ تنہا پیڑ ہوں جنگل کا مری پتے جھڑتے جاتے ہیں ہے وہ ہے وہ ہے وہ کون ہوں کیا ہوں کب کی ہوں ایک تیری کب ہوں سب کی ہوں ہے وہ ہے وہ ہے وہ کوئل ہوں شہراو کی مجھے تاب نہیں ہے چھاؤں کی ایک دلدل ہے تری وعدوں کی مری پیر اکھڑتے جاتے ہیں مری زخم نہیں بھرتے یاروں مری ناخون بڑھتے جاتے ہیں ہے وہ ہے وہ ہے وہ ک سے بچے کی گڑیا تھی ہے وہ ہے وہ ہے وہ ک سے پنجرے کی چڑیا تھی مری کھیلنے والے ک ہاں گئے مجھے چومنے والے ک ہاں گئے مری بالیاں گروی مت رکھنا مری کنگن توڑ نا دینا ہے وہ ہے وہ ہے وہ بنجر ہوتی جاتی ہوں کہی دریا موڑ نا دینا کبھی ملنا ا سے پر سوچیںگے ہم کیا منزل پر پہنچیں گے راستوں ہے وہ ہے وہ ہی لڑتے جاتے ہیں مری زخم نہیں بھرتے یاروں مری ناخون بڑھتے جاتے ہیں
Tehzeeb Hafi
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بھلی سی ایک شکل تھی بھلے دنوں کی بات ہے بھلی سی ایک شکل تھی نہ یہ کہ حسن تام ہوں نہ دیکھنے ہے وہ ہے وہ آم سی نہ یہ کہ حقیقت چلے تو کہکشاں سی رہگزر لگے مگر حقیقت ساتھ ہوں تو پھروں بھلا بھلا سفر لگے کوئی بھی رت ہوں اس کا کی چھب فضا کا رنگ روپ تھی حقیقت گرمیوں کی چھاؤں تھی حقیقت سردیوں کی دھوپ تھی نہ مدتوں جدا رہے نہ ساتھ صبح و شام ہوں نہ رشتہ وفا پہ ضد نہ یہ کہ اجازت عام ہوں نہ ایسی خوش لباسیاں کہ سادگی گلہ کرے نہ اتنی بے تکلفی کہ آئینہ حیا کرے نہ اختلاط ہے وہ ہے وہ حقیقت رم کہ بد مزہ ہوں خواہشیں نہ اس کا دودمان سپردگی کہ زچ کریں نوازشیں نہ کرنے والے جنون کی کہ زندگی عذاب ہوں نہ اس کا دودمان کٹھور پن کہ دوستی خراب ہوں کبھی تو بات بھی خفی کبھی سکوت بھی سخن کبھی تو کشت زعفران کبھی اداسیوں کا بن سنا ہے ایک عمر ہے معاملات دل کی بھی وصال جاں فزا تو کیا فراق جاں گسل کی بھی سو ایک روز کیا ہوا وفا پہ بحث چھڑ گئی ہے وہ ہے وہ ہے وہ عشق کو فدا کہوں حقیقت
Ahmad Faraz
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کچی عمر کے پیار یہ کچی عمر کے پیار بھی بڑے پکے نشان دیتے ہیں آج پر کم دھیان دیتے ہیں بہکے بہکے نقص دیتے ہیں ان کو دیکھے ہوئے مدت ہوئی اور ہم اب بھی جان دیتے ہیں کیا پیار ایک بار ہوتا ہے نہیں یہ بار بار ہوتا ہے تو پھروں کیوں کسی ایک کا انتظار ہوتا ہے وہی تو سچا پیار ہوتا ہے اچھا پیار بھی کیا انسان ہوتا ہے کبھی سچا کبھی جھوٹا بے ایمان ہوتا ہے ا سے کی رگوں ہے وہ ہے وہ بھی کیا خاندان ہوتا ہے اور مقصد حیات نفع نقصان ہوتا ہے پیار تو پیار ہوتا ہے
Yasra rizvi
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"कब" कब ये पेड़ हरे होंगे फिर से कब ये कलियाँ फूटेंगी और ये फूल हसेंगे कब ये झरने अपनी प्यास भरेंगे कब ये नदियाँ शोर मचाएँगी कब ये आज़ाद किए जाएँगे सब पंछी कब जंगल साँसे लेंगे कब सब जाएँगे अपने घर कब हाथों से ज़ंजीरें खोली जाएँगी कब हम ऐसों को पूछेगा कोई और ये फ़क़ीरों को भी क़िस्से में लाया जाएगा कब इन काँटों की भी क़ीमत होगी और मिट्टी सोने के भाव में आएगी कब लोगों की ग़लती टाली जाएगी कब ये हवाएँ पायल पहने झूमेगी कब अंबर से परियाँ उतरेंगी कब पत्थरों से भी ख़ुशबू आएगी कब हंसों के जोड़ें नदियों पे बैठेंगे बरखा गीत बनाएगी और मोर उठा के पर कत्थक करते देखे जाएँगे नीलकमल पानी से इश्क़ लड़ाएंगे मछलियाँ ख़ुशी के गोते मारेंगी कब कोयल की कूक सुनाई देगी कब भॅंवरे फिर गुन- गुन करते लौटेंगे बागों में और कब ये प्यारी तितलियाँ कलर फेकेंगी फिर सब कुछ डूबा होगा रंगों में कब ये दुनिया रौशन होगी कब ये जुगनू अपने रंग में आएँगे कब ये सब मुमकिन है कब सबके ही सपने पूरे होंगे कब अपने मन के मुताबिक़ होगा सब कुछ कब ये बहारें लोटेंगी कब वो तारीख़ आएगी बस मुझ को ही नहीं सब को इंतिज़ार है तेरे ' बर्थडे ' का
BR SUDHAKAR
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دکھ مجھے جو لگا حقیقت نہیں ہوں ہے وہ ہے وہ ہے وہ اب ا سے جگہ تو نہیں ہوں تو اک کال میسج نہیں کر رہی ہے کہ ایسی حقیقت کیا ہی شکایت ہے جو مجھ سے تو کر نہیں پا رہی ہے بتاتی نہیں ہے ستاتی رہی ہے مجھے تو بتا کیوں خفا ہے مجھے تو بتا کیا ہوا ہے تو کچھ بول یہ خموشی کاٹتی ہے مجھے جان لے ب سے یہ آنکھیں کسے روتی ہے ب سے مجھے کس کا دکھ ہے مجھے پوچھ تو پھروں بتاؤں تیرا نام ہے وہ ہے وہ اور تجھے ہے وہ ہے وہ سناؤں دکھاؤں میرا غم مری زخم جو بھر نہیں پا رہے ہیں مجھے تری ایسے ستانے کا دکھ ہے تری لوٹ کے پھروں لگ آنے کا دکھ ہے مری پا سے آ میرا دکھ جان لڑکی سخی کوئی اتنا خفا بھی نہیں ہوتا ہے چنو کہ تو ہے کہ غصہ زیادہ دینو تک نہیں کرنا ہوتا ہے سمجھی اے لڑکی کہ غلطی بھلانے کے خاطر بنی ہے محبت نبھانے کے خاطر بنی ہے کہ جب دوستی کر لی جائے اسے پھروں نبھانا بھی ہوتا ہے لڑکی مجھے یاد ہے تو م گر ہے وہ ہے وہ بھلایا گیا تو ہوں تو بے شک مجھے چھوڑ دے پر ذرا سن کہی بھی کبھی بھی کسی بھی ہاں دریا نے پیاسے کو پیاسا نہیں م
BR SUDHAKAR
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हम दोनो घर चल देंगे हाथ पकड़ कर रख मेरा सर सीने पर रख मेरा यक़ीन तू कर, तू कहीं जाने वाला नहीं है वेंटिलेटर कम पड़ जाए तो क्या ? अपने हाथों को वेंटिलेटर, मैं बना दूँगा मैं तेरी सांसो की ख़ातिर सच में सनम मैं अपनी सांसे तक गिरवी रख दूँगा मैं रब से झगड़ा कर लूंगा पर कैसे भी मैं तुझ को जाने नहीं दूँगा तू घबरा मत सब कुछ ठीक हो जाएगा जैसे पहले था सब वैसा हो जाएगा तू रो मत इतनी सी तो बात है, और इतना कुछ तो हम ने साथ में झेला है और फिर इक दिन ये भी दुख चला जाएगा ऐसा समझो हम एक जंग में है ऐसा जानो हम जीतेंगे बस तू अपना हौसला मत जाने देना बाकी तो तू मुझ पर छोड़ दे सब कुछ मैं हूँ ना !! क्यूँ फिक्र तू करती है ? जैसे कट जाता है हर इक दिन वैसे ये दिन भी कट जाएगा ये अँधेरा धीरे-धीरे हट जाएगा फिर से सहर होगी हमनें कितना कुछ जीना है अभी तो अपना वेट भी करता होगा, घर अपना तेरी बातों में फिर से खोना है मुझे तेरे साथ अभी कितना हँसना है मुझे मैं ने तेरे हाथों का खाना फिर से खाना है तू टेंशन मत रख हम जल्दी ही घर चल देंगे तुझ को कुछ नहीं होगा बस कुछ दिन की बात है फिर हम दोनो घर चल देंगे
BR SUDHAKAR
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उस का चेहरा सिंपल सादा सा भोला चेहरा है यार क़सम से वो प्यारा चेहरा है पेड़ नदी ये फूल सभी छोड़ो उस को देखो उस का चेहरा है दुनिया लाख हसीन हो सकती है लेकिन उस का चेहरा चेहरा है देख उसे कह डाला हम ने भी बातें प्यारी हैं प्यारा चेहरा है इक तिल होट पे, गाल के नीचे इक और वो चाँद सा नाक पे नूर लिए दो प्यारी आँखें, और सुर्ख़ से लब प्यार मिलाकर अपना रंगों में हम ने बनाया उस का चेहरा है भोली सूरत पे वो अकड़ देखो ग़लती कर के घुमाया चेहरा है रूठ गई जो हम सेे कभी वो दोस्त सब सेे पहले चुराया चेहरा है जब भी उस को चूमने आए हम होट से पहले आया चेहरा है मुँह से इक वो स्वाद नहीं जाता जबसे उस का चूमा चेहरा है रात का होना उस की आँखें हैं दिन का निकलना उस का चेहरा है दुनिया में है उस के चेहरे से है नूर रौशनी लाया उस का चेहरा है हम जैसे भी दरिया करेंगे पार ! अब जो सहारा उस का चेहरा है हम आबाद रहेंगे ऐसे ही हम पे गर साया वो चेहरा है वो चेहरा है बस वो चेहरा है हम को बस वो चेहरा चेहरा है हम ने चाहा बस वो चेहरा है हम ने माँगा बस वो चेहरा है हम ने देखा भी तो वो चेहरा हम ने सोचा बस वो चेहरा है
BR SUDHAKAR
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