دکھ مجھے جو لگا حقیقت نہیں ہوں ہے وہ ہے وہ ہے وہ اب ا سے جگہ تو نہیں ہوں تو اک کال میسج نہیں کر رہی ہے کہ ایسی حقیقت کیا ہی شکایت ہے جو مجھ سے تو کر نہیں پا رہی ہے بتاتی نہیں ہے ستاتی رہی ہے مجھے تو بتا کیوں خفا ہے مجھے تو بتا کیا ہوا ہے تو کچھ بول یہ خموشی کاٹتی ہے مجھے جان لے ب سے یہ آنکھیں کسے روتی ہے ب سے مجھے کس کا دکھ ہے مجھے پوچھ تو پھروں بتاؤں تیرا نام ہے وہ ہے وہ اور تجھے ہے وہ ہے وہ سناؤں دکھاؤں میرا غم مری زخم جو بھر نہیں پا رہے ہیں مجھے تری ایسے ستانے کا دکھ ہے تری لوٹ کے پھروں لگ آنے کا دکھ ہے مری پا سے آ میرا دکھ جان لڑکی سخی کوئی اتنا خفا بھی نہیں ہوتا ہے چنو کہ تو ہے کہ غصہ زیادہ دینو تک نہیں کرنا ہوتا ہے سمجھی اے لڑکی کہ غلطی بھلانے کے خاطر بنی ہے محبت نبھانے کے خاطر بنی ہے کہ جب دوستی کر لی جائے اسے پھروں نبھانا بھی ہوتا ہے لڑکی مجھے یاد ہے تو م گر ہے وہ ہے وہ بھلایا گیا تو ہوں تو بے شک مجھے چھوڑ دے پر ذرا سن کہی بھی کبھی بھی کسی بھی ہاں دریا نے پیاسے کو پیاسا نہیں م
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ہے وہ ہے وہ سگریٹ تو نہیں پیتا م گر ہر آنے والے سے پوچھ لیتا ہوں کہ ماچ سے ہے بے حد کچھ ہے جسے ہے وہ ہے وہ پھونک دینا چاہتا ہوں
Gulzar
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دولت نا عطا کرنا مولا شہرت نا عطا کرنا مولا ب سے اتنا عطا کرنا چاہے جنت نا عطا کرنا مولا شمہ وطن کی لو پر جب قربان پتنگا ہوں ہونٹوں پر گنگا ہوں ہاتھوں ہے وہ ہے وہ ترنگا ہوں ہونٹوں پر گنگا ہوں ہاتھوں ہے وہ ہے وہ ترنگا ہوں ب سے ایک صدا ہی سنیں صدا برفیلی مست ہواؤں ہے وہ ہے وہ ہے وہ ب سے ایک دعا ہی اٹھے صدا جلتے تپتے صحراؤں ہے وہ ہے وہ ہے وہ جیتے جی ا سے مان رکھیں مر کر مریادہ یاد رہے ہم رہیں کبھی نا رہیں م گر ا سے کی سج دھج آباد رہے جن من ہے وہ ہے وہ اچھل دیش پریم کا جلدھی ترنگا ہوں ہونٹوں پر گنگا ہوں ہاتھوں ہے وہ ہے وہ ترنگا ہوں ہونٹوں پر گنگا ہوں ہاتھوں ہے وہ ہے وہ ترنگا ہوں گیتا کا گیان سنے نا سنیں ا سے دھرتی کا یشگان سنیں ہم سبد کیرتن سن نا سکیں بھارت ماں کا جےگان سنیں परवरदिगार,मैं تری دوار پر لے پکار یہ آیا ہوں چاہے اذان نا سنیں کان پر جے جے ہندوستان سنیں جن من ہے وہ ہے وہ اچھل دیش پریم کا جلدھی ترنگا ہوں ہونٹوں پر گنگا ہوں ہاتھوں ہے وہ ہے وہ ترنگا ہوں ہونٹوں پر گنگا ہوں ہاتھوں ہے وہ ہے وہ ترنگا ہوں
Kumar Vishwas
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بہت خوبصورت ہوں جاناں بہت خوبصورت ہوں جاناں کبھی ہے وہ ہے وہ جو کہ دوں محبت ہے جاناں سے تو مجھ کو خدارا غلط مت سمجھنا کہ میری ضرورت ہوں جاناں بہت خوبصورت ہوں جاناں ہیں پھولوں کی ڈالی پہ بانہیں تمہاری ہیں خاموش جادو نگاہیں تمہاری جو کانٹے ہوں سب اپنے دامن ہے وہ ہے وہ رکھ لوں سجاؤں ہے وہ ہے وہ کلیوں سے راہیں تمہاری نظر سے زمانے کی خود کو بچانا کسی اور سے دیکھو دل مت لگانا کہ میری امانت ہوں جاناں بہت خوبصورت ہوں جاناں کبھی نڈھال کی قطاروں ہے وہ ہے وہ ڈھونڈا چمکتے ہوئے چاند تاروں ہے وہ ہے وہ ڈھونڈا خزاؤں ہے وہ ہے وہ ڈھونڈا بہاروں ہے وہ ہے وہ ڈھونڈا مچلتے ہوئے آبشاروں ہے وہ ہے وہ ڈھونڈا حقیقت ہے وہ ہے وہ دیکھا فسانے ہے وہ ہے وہ دیکھا نہ جاناں سا ہنسی ای سے زمانے دیکھا نہ دنیا کی رنگین محفل ہے وہ ہے وہ پایا جو پایا تمہیں اپنا ہی دل ہے وہ ہے وہ پایا ایک ایسی مسرت ہوں جاناں بہت خوبصورت ہوں جاناں ہے چہرہ تمہارا کہ دن ہے سنہرا ہے چہرہ تمہارا کہ دن ہے سنہرا اور ای سے پر یہ کالی گھٹاؤں کا پہرہ گلابوں س
Tahir Faraz
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मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मुझ से पहले कितने शाइ'र आए और आ कर चले गए कुछ आहें भर कर लौट गए, कुछ नग़ में गा कर चले गए वे भी एक पल का क़िस्सा थे, मैं भी एक पल का क़िस्सा हूँ कल तुम से जुदा हो जाऊँगा गो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है कल और आएँगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले मुझ सेे बेहतर कहने वाले, तुम सेे बेहतर सुनने वाले कल कोई मुझ को याद करे, क्यूँ कोई मुझ को याद करे मसरुफ़ ज़माना मेरे लिए, क्यूँ वक़्त अपना बर्बाद करे मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें ख़त्म नहीं होतीं ख़्वाबों और उमँगों की मियादें ख़त्म नहीं होतीं इक फूल में तेरा रूप बसा, इक फूल में मेरी जवानी है इक चेहरा तेरी निशानी है, इक चेहरा मेरी निशानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है तुझ को मुझ को जीवन अमृत अब इन हाथों से पीना है इन की धड़कन में बसना है, इन की साँसों में जीना है तू अपनी अदाएं बक्ष इन्हें, मैं अपनी वफ़ाएँ देता हूँ जो अपने लिए सोचीं थी कभी, वो सारी दुआएँ देता हूँ मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है
Sahir Ludhianvi
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''चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ'' चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ जो लफ़्ज़ कहूँ वो हो जाए बस अश्क कहूँ तो एक आँसू तेरे गोरे गाल को धो जाए मैं आ लिक्खूँ तू आ जाए मैं बैठ लिक्खूँ तू आ बैठे मेरे शाने पर सर रक्खे तू मैं नींद कहूँ तू सो जाए मैं काग़ज़ पर तेरे होंठ लिक्खूँ तेरे होंठों पर मुस्कान आए मैं दिल लिक्खूँ तू दिल था में मैं गुम लिक्खूँ वो खो जाए तेरे हाथ बनाऊँ पेंसिल से फिर हाथ पे तेरे हाथ रखूँ कुछ उल्टा सीधा फ़र्ज़ करूँँ कुछ सीधा उल्टा हो जाए मैं आह लिखूँ तू हाए करे बेचैन लिखूँ बेचैन हो तू फिर बेचैन का बे काटूँ तुझे चैन ज़रा सा हो जाए अभी ऐन लिखूँ तू सोचे मुझे फिर शीन लिखूँ तेरी नींद उड़े जब क़ाफ़ लिखूँ तुझे कुछ कुछ हो मैं इश्क़ लिखूँ तुझे हो जाए
Amir Ameer
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हम दोनो घर चल देंगे हाथ पकड़ कर रख मेरा सर सीने पर रख मेरा यक़ीन तू कर, तू कहीं जाने वाला नहीं है वेंटिलेटर कम पड़ जाए तो क्या ? अपने हाथों को वेंटिलेटर, मैं बना दूँगा मैं तेरी सांसो की ख़ातिर सच में सनम मैं अपनी सांसे तक गिरवी रख दूँगा मैं रब से झगड़ा कर लूंगा पर कैसे भी मैं तुझ को जाने नहीं दूँगा तू घबरा मत सब कुछ ठीक हो जाएगा जैसे पहले था सब वैसा हो जाएगा तू रो मत इतनी सी तो बात है, और इतना कुछ तो हम ने साथ में झेला है और फिर इक दिन ये भी दुख चला जाएगा ऐसा समझो हम एक जंग में है ऐसा जानो हम जीतेंगे बस तू अपना हौसला मत जाने देना बाकी तो तू मुझ पर छोड़ दे सब कुछ मैं हूँ ना !! क्यूँ फिक्र तू करती है ? जैसे कट जाता है हर इक दिन वैसे ये दिन भी कट जाएगा ये अँधेरा धीरे-धीरे हट जाएगा फिर से सहर होगी हमनें कितना कुछ जीना है अभी तो अपना वेट भी करता होगा, घर अपना तेरी बातों में फिर से खोना है मुझे तेरे साथ अभी कितना हँसना है मुझे मैं ने तेरे हाथों का खाना फिर से खाना है तू टेंशन मत रख हम जल्दी ही घर चल देंगे तुझ को कुछ नहीं होगा बस कुछ दिन की बात है फिर हम दोनो घर चल देंगे
BR SUDHAKAR
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"ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर" सोच नहीं सकता था मैं इक रंग मेरे सब होश उड़ा सकता है सोच नहीं सकता था ख़ुदा किसी को इतना भी हसीन बना सकता है दोस्त तेरी तस्वीर को देख लगा है कुछ यूँँ जैसे चंदा रात को झील में अपना अक्स बना दे और धीरे-धीरे उस में चलने लग जाए फिर रुक जाए और हसने लग जाए तेरी ही तस्वीर से ऐसा ख़याल आया है दुनिया गर ब्लैक एंड व्हाइट ही, होती तो कुछ ख़ास हसीन, ये होती ये बस इक तस्वीर नहीं है एक अलग सी बात है इस में वो जो शायद कहीं नहीं है जो इन फूलों के रंगों में नहीं हैं जो जंगल में नहीं है जो शहरों में नहीं है जो महलों में नहीं है ये वो है जो अब तक देखा नहीं है तेरी ये तस्वीर वो जादू है जिस को दिखा कर जादूगरों ने सब को हैरत में डाला हुआ है दोस्त ज़ुल्फ़ तेरी नागिन है लब दरिया में रक्खे उन सीपी के जैसे हैं जो खुल जाए तो बस मोती ही मोती चेहरा भोला है आँखें बिजली हैं कोई परी है तू कहने को लड़की है हाए नज़र न तुझे लग जाए कोई यार तू इतनी हसीन है तू शाइ'र का दीन है तू कितनो का यक़ीन है गर अपनी तस्वीर तू खोल दे तो फिर तेरे दिलबर इतने हो जाएँगे लोग ख़ुदा को छोड़ तेरे ही पास चले आएँगे तेरी इक तस्वीर से जंग कराई जा सकती तेरी इक तस्वीर से एक अलग कोई दुनिया बनाई जा सकती है ये बस ब्लैक एंड व्हाइट रंग में इक तस्वीर नहीं है तू ये पूछ कि क्या ये नहीं है ? जिस की काट नहीं हो ऐसी हक़ीक़त है ये सबके ख़ुदा की ज़ियारत है ये भटके हुए को सुकूनत है ये मिल के सब अच्छा हो जैसे क़िस्मत है ये जिस के बगैर अदीब नहीं हो शाइ'र की वो ज़रूरत है ये ख़ुद में से'आदत है ये मुझ को सरवत है ये भोली शरारत है ये पाक मोहब्बत है ये सारी आयत है ये सारी रहमत है ये सब के दिल पे हुकूमत ये है इस शाइ'र की रंगत है ये ये बस इक तस्वीर नहीं है
BR SUDHAKAR
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उस का चेहरा सिंपल सादा सा भोला चेहरा है यार क़सम से वो प्यारा चेहरा है पेड़ नदी ये फूल सभी छोड़ो उस को देखो उस का चेहरा है दुनिया लाख हसीन हो सकती है लेकिन उस का चेहरा चेहरा है देख उसे कह डाला हम ने भी बातें प्यारी हैं प्यारा चेहरा है इक तिल होट पे, गाल के नीचे इक और वो चाँद सा नाक पे नूर लिए दो प्यारी आँखें, और सुर्ख़ से लब प्यार मिलाकर अपना रंगों में हम ने बनाया उस का चेहरा है भोली सूरत पे वो अकड़ देखो ग़लती कर के घुमाया चेहरा है रूठ गई जो हम सेे कभी वो दोस्त सब सेे पहले चुराया चेहरा है जब भी उस को चूमने आए हम होट से पहले आया चेहरा है मुँह से इक वो स्वाद नहीं जाता जबसे उस का चूमा चेहरा है रात का होना उस की आँखें हैं दिन का निकलना उस का चेहरा है दुनिया में है उस के चेहरे से है नूर रौशनी लाया उस का चेहरा है हम जैसे भी दरिया करेंगे पार ! अब जो सहारा उस का चेहरा है हम आबाद रहेंगे ऐसे ही हम पे गर साया वो चेहरा है वो चेहरा है बस वो चेहरा है हम को बस वो चेहरा चेहरा है हम ने चाहा बस वो चेहरा है हम ने माँगा बस वो चेहरा है हम ने देखा भी तो वो चेहरा हम ने सोचा बस वो चेहरा है
BR SUDHAKAR
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"कब" कब ये पेड़ हरे होंगे फिर से कब ये कलियाँ फूटेंगी और ये फूल हसेंगे कब ये झरने अपनी प्यास भरेंगे कब ये नदियाँ शोर मचाएँगी कब ये आज़ाद किए जाएँगे सब पंछी कब जंगल साँसे लेंगे कब सब जाएँगे अपने घर कब हाथों से ज़ंजीरें खोली जाएँगी कब हम ऐसों को पूछेगा कोई और ये फ़क़ीरों को भी क़िस्से में लाया जाएगा कब इन काँटों की भी क़ीमत होगी और मिट्टी सोने के भाव में आएगी कब लोगों की ग़लती टाली जाएगी कब ये हवाएँ पायल पहने झूमेगी कब अंबर से परियाँ उतरेंगी कब पत्थरों से भी ख़ुशबू आएगी कब हंसों के जोड़ें नदियों पे बैठेंगे बरखा गीत बनाएगी और मोर उठा के पर कत्थक करते देखे जाएँगे नीलकमल पानी से इश्क़ लड़ाएंगे मछलियाँ ख़ुशी के गोते मारेंगी कब कोयल की कूक सुनाई देगी कब भॅंवरे फिर गुन- गुन करते लौटेंगे बागों में और कब ये प्यारी तितलियाँ कलर फेकेंगी फिर सब कुछ डूबा होगा रंगों में कब ये दुनिया रौशन होगी कब ये जुगनू अपने रंग में आएँगे कब ये सब मुमकिन है कब सबके ही सपने पूरे होंगे कब अपने मन के मुताबिक़ होगा सब कुछ कब ये बहारें लोटेंगी कब वो तारीख़ आएगी बस मुझ को ही नहीं सब को इंतिज़ार है तेरे ' बर्थडे ' का
BR SUDHAKAR
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