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Tanhai” ke results

Sher

मेरी तन्हाई देखेंगे तो हैरत ही करेंगे लोग मोहब्बत छोड़ देंगे या मोहब्बत ही करेंगे लोग

Ismail Raaz

मैं हूँ दिल है तन्हाई है तुम भी होते अच्छा होता

Firaq Gorakhpuri

दर्द, मुहब्बत, तन्हाई है लड़कों में किस ने अफवाह फैलाई है लड़कों में इक दूजे से कटे कटे से रहते हैं क्या कोई लड़की आई है लड़को में

Rohit Gustakh

तन्हाई ये तंज करे है तन्हा क्यूँ है यार कहाँ है आगे पीछे चलने वाले

Vishal Singh Tabish

नाप रहा था एक उदासी की गहराई हाथ पकड़कर वापस लाई है तन्हाई वस्ल दिनों को काफ़ी छोटा कर देता है हिज्र बढ़ा देता है रातों की लम्बाई

Tanoj Dadhich

मौत ने सारी रात हमारी नब्ज़ टटोली ऐसा मरने का माहौल बनाया हम ने घर से निकले चौक गए फिर पार्क में बैठे तन्हाई को जगह-जगह बिखराया हम ने

Shariq Kaifi

हम दोनों मिल कर भी दिलों की तन्हाई में भटकेंगे पागल कुछ तो सोच ये तू ने कैसी शक्ल बनाई है

Jaun Elia

ज़िंदगी शायद इसी का नाम है दूरियाँ मजबूरियाँ तन्हाइयाँ

Kaif Bhopali

शोर की इस भीड़ में ख़ामोश तन्हाई सी तुम ज़िन्दगी है धूप तो मद-मस्त पुर्वाई सी तुम चाहे महफ़िल में रहूँ चाहे अकेले में रहूँ गूँजती रहती हो मुझ में शोख़ शहनाई सी तुम

Kunwar Bechain

तन्हाइयाँ तुम्हारा पता पूछती रहीं शब-भर तुम्हारी याद ने सोने नहीं दिया

Unknown

Nazm

"रम्ज़" तुम जब आओगी तो खोया हुआ पाओगी मुझे मेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ भी नहीं मेरे कमरे को सजाने की तमन्ना है तुम्हें मेरे कमरे में किताबों के सिवा कुछ भी नहीं इन किताबों ने बड़

Jaun Elia

"ख़ुदा का सवाल" मेरे रब की मुझ पर इनायत हुई कहूँ भी तो कैसे इबादत हुई हक़ीक़त हुई जैसे मुझ पर अयाँ क़लम बन गई है ख़ुदा की ज़बाँ मुख़ातिब है बंदे से परवरदिगार तू हुस्न-ए-चमन तू ही रंग-ए-बहार त

Abrar Kashif

"मुझ सेे पहले" मुझ सेे पहले तुझे जिस शख़्स ने चाहा उस ने शायद अब भी तिरा ग़म दिल से लगा रक्खा हो एक बे-नाम सी उम्मीद पे अब भी शायद अपने ख़्वाबों के जज़ीरों को सजा रक्खा हो मैं ने माना कि वो

Ahmad Faraz

मैं बंजारा वक़्त के कितने शहरों से गुज़रा हूँ लेकिन वक़्त के इस इक शहर से जाते जाते मुड़ के देख रहा हूँ सोच रहा हूँ तुम से मेरा ये नाता भी टूट रहा है तुम ने मुझ को छोड़ा था जिस शहर में आ कर वक़

Javed Akhtar

रात सुनसान थी बोझल थीं फ़ज़ा की साँसें रूह पर छाए थे बे-नाम ग़मों के साए दिल को ये ज़िद थी कि तू आए तसल्ली देने मेरी कोशिश थी कि कम्बख़्त को नींद आ जाए देर तक आँखों में चुभती रही तारों की चमक दे

Sahir Ludhianvi

और कुछ देर में जब फिर मिरे तन्हा दिल को फ़िक्र आ लेगी कि तन्हाई का क्या चारा करे दर्द आएगा दबे पाँव लिए सुर्ख़ चराग़ वो जो इक दर्द धड़कता है कहीं दिल से परे शोला-ए-दर्द जो पहलू में लपक उट्ठेगा द

Faiz Ahmad Faiz

मेरे ख़्वाबों के झरोकों को सजाने वाली तेरे ख़्वाबों में कहीं मेरा गुज़र है कि नहीं पूछ कर अपनी निगाहों से बता दे मुझ को मेरी रातों के मुक़द्दर में सहर है कि नहीं चार दिन की ये रिफ़ाक़त जो रिफ़ाक

Sahir Ludhianvi

शहर-ए-दिल की गलियों में शाम से भटकते हैं चाँद के तमन्नाई बे-क़रार सौदाई दिल-गुदाज़ तारीकी जाँ-गुदाज़ तन्हाई रूह-ओ-जाँ को डसती है रूह-ओ-जाँ में बस्ती है शहर-ए-दिल की गलियों में ताक

Ibn E Insha

'उदासी' इबारत जो उदासी ने लिखी है बदन उस का ग़ज़ल सा रेशमी है किसी की पास आती आहटों से उदासी और गहरी हो चली है उछल पड़ती हैं लहरें चाँद तक जब समुंदर की उदासी टूटती है उदासी के परिंदों तुम

Sandeep Thakur

ऐ सिपहर-ए-बरीं के सय्यारो ऐ फ़ज़ा-ए-ज़मीं के गुल-ज़ारो ऐ पहाड़ों की दिल-फ़रेब फ़ज़ा ऐ लब-ए-जू की ठंडी ठंडी हवा ऐ अनादिल के नग़मा-ए-सहरी ऐ शब-ए-माहताब तारों भरी ऐ नसीम-ए-बहार के झोंको दहर

Altaf Hussain Hali

Ghazal

शैतान के दिल पर चलता हूँ सीनों में सफ़र करता हूँ उस आँख का क्या बचता है मैं जिस आँख में घर करता हूँ जो मुझ में उतरे हैं उन को मेरी लहरों का अंदाज़ा है दरियाओ में उठता बैठता हूँ सैलाब बसर करता ह

Tehzeeb Hafi

परखना मत परखने में कोई अपना नहीं रहता किसी भी आइने में देर तक चेहरा नहीं रहता बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना जहाँ दरिया समुंदर से मिला दरिया नहीं रहता हज़ारों शे'र मेरे सो गए का

Bashir Badr

तेरी ख़ुश्बू का पता करती है मुझ पे एहसान हवा करती है चूम कर फूल को आहिस्ता से मोजज़ा बाद-ए-सबा करती है खोल कर बंद-ए-क़बा गुल के हवा आज ख़ुश्बू को रिहा करती है अब्र बरसते तो इनायत उस की शाख़

Parveen Shakir

कोई नहीं है आने वाला फिर भी कोई आने को है आते जाते रात और दिन में कुछ तो जी बहलाने को है चलो यहाँ से अपनी अपनी शाख़ों पे लौट आए परिंदे भूली-बिसरी यादों को फिर तन्हाई दोहराने को है दो दरवाज़े एक हवेल

Nida Fazli

कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की उस ने ख़ुशबू की तरह मेरी पज़ीराई की कैसे कह दूँ कि मुझे छोड़ दिया है उस ने बात तो सच है मगर बात है रुस्वाई की वो कहीं भी गया लौटा तो मिरे पास आया बस यही बात है अच्छ

Parveen Shakir

इसी से होता है ज़ाहिर जो हाल दर्द का है सभी को कोई न कोई वबाल दर्द का है सहर सिसकते हुए आसमान से उतरी तो दिल ने जान लिया ये भी साल दर्द का है ये झाँक लेती है दिल से जो दूसरे दिल में मेरी निगाह में स

Farhat Abbas Shah

ज़िंदगी आज ये किस मोड़ पे ले आई है भीड़ नज़रों में है एहसास में तन्हाई है ये अलग बात कि अंजान नज़र आई है ज़ीस्त से वैसे तो बरसों की शनासाई है जैसे आता हो दबे पाँव कोई पास मिरे इस तरह दिल के धड़

Daud Naseeb

मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा दीवारों से सर टकराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा हर बात गवारा कर लोगे मिन्नत भी उतारा कर लोगे ता'वीज़ें भी बंधवाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा तन्हा

Said Rahi

तू भी चुप है मैं भी चुप हूँ ये कैसी तन्हाई है तेरे साथ तिरी याद आई क्या तू सच-मुच आई है शायद वो दिन पहला दिन था पलकें बोझल होने का मुझ को देखते ही जब उस की अँगड़ाई शरमाई है उस दिन पहली बार हुआ

Jaun Elia

ऐ दिल-ए-ख़ुद-ना-शनास ऐसा भी क्या आईना और इस क़दर अंधा भी क्या उस को देखा भी मगर देखा भी क्या अर्सा-ए-ख़्वाहिश में इक लम्हा भी क्या दर्द का रिश्ता भी है तुझ से बहुत और फिर ये दर्द का रिश्ता भी कि

Ummeed Fazli