ghazalKuch Alfaaz
मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा दीवारों से सर टकराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा हर बात गवारा कर लोगे मिन्नत भी उतारा कर लोगे ता'वीज़ें भी बंधवाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा तन्हाई के झूले खोलेंगे हर बात पुरानी भूलेंगे आईने से तुम घबराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा जब सूरज भी खो जाएगा और चाँद कहीं सो जाएगा तुम भी घर देर से आओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा बेचैनी बढ़ जाएगी और याद किसी की आएगी तुम मेरी ग़ज़लें गाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा
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