Top 20 Sher Series

Top 20 Sher by One of the most prominent

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20

Sher

20

Ghazal

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Nazm

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Featured Picks

Series se pehle kuch standout sher padhein.

अंजाम-ए-वफ़ा ये है जिस ने भी मोहब्बत की मरने की दुआ माँगी जीने की सज़ा पाई

~ Unknown

दिया ख़ामोश है लेकिन किसी का दिल तो जलता है चले आओ जहाँ तक रौशनी मा'लूम होती है

~ Unknown

हज़ार शम्अ फ़रोज़ाँ हो रौशनी के लिए नज़र नहीं तो अंधेरा है आदमी के लिए

~ Unknown

अंजाम-ए-वफ़ा ये है जिस ने भी मोहब्बत की मरने की दुआ माँगी जीने की सज़ा पाई

~ Unknown

दिया ख़ामोश है लेकिन किसी का दिल तो जलता है चले आओ जहाँ तक रौशनी मा'लूम होती है

~ Unknown

हज़ार शम्अ फ़रोज़ाँ हो रौशनी के लिए नज़र नहीं तो अंधेरा है आदमी के लिए

~ Unknown

मैं अभी से किस तरह उन को बेवफ़ा कहूँ मंज़िलों की बात है रास्ते में क्या कहूँ

~ Unknown

क़दम मय-ख़ाना में रखना भी कार-ए-पुख़्ता-काराँ है जो पैमाना उठाते हैं वो थर्राया नहीं करते

~ Unknown

इक नज़र का फ़साना है दुनिया सौ कहानी है इक कहानी से

~ Unknown

मेरी आँखों में हैं आँसू तेरे दामन में बहार गुल बना सकता है तू शबनम बना सकता हूँ मैं

~ Unknown

ज़माना याद करे या सबा करे ख़ामोश हम इक चराग़-ए-मोहब्बत जलाए जाते हैं

~ Unknown

एक रिश्ता भी मोहब्बत का अगर टूट गया देखते देखते शीराज़ा बिखर जाता है

~ Unknown

यही काँटे तो कुछ ख़ुद्दार हैं सेहन-ए-गुलिस्ताँ में कि शबनम के लिए दामन तो फैलाया नहीं करते

~ Unknown

ज़िंदगी परछाइयाँ अपनी लिए आइनों के दरमियाँ से आई है

~ Unknown

हम रिवायात को पिघला के 'नुशूर' इक नए फ़न के क़रीब आ पहुँचे

~ Unknown

हक़ीक़त जिस जगह होती है ताबानी बताती है कोई पर्दे में होता है तो चिलमन जगमगाती है

~ Unknown

हस्ती का नज़ारा क्या कहिए मरता है कोई जीता है कोई जैसे कि दिवाली हो कि दिया जलता जाए बुझता जाए

~ Unknown

उसी को ज़िंदगी का साज़ दे के मुतमइन हूँ मैं वो हुस्न जिस को हुस्न-ए-बे-सबात कहते आए हैं

~ Unknown

है शाम अभी क्या है बहकी हुई बातें हैं कुछ रात ढले साक़ी मय-ख़ाना सँभलता है

~ Unknown

ख़ाक और ख़ून से इक शम्अ जलाई है 'नुशूर' मौत से हम ने भी सीखी है हयात-आराई

~ Unknown

वा'दे और ए'तिबार में है रब्त-ए-बाहमी इस रब्त-ए-बाहमी का मगर ए'तिबार किया

~ Unknown

अग़्यार को गुल-पैरहनी हम ने अता की अपने लिए फूलों का कफ़न हम ने बनाया

~ Unknown

'नुशूर' आलूदा-ए-इस्याँ सही पर कौन बाक़ी है ये बातें राज़ की हैं क़िब्ला-ए-आलम भी पीते हैं

~ Unknown

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