kahan tak vaqt ke dariya ko ham thahra hua dekhen ye hasrat hai ki in ankhon se kuchh hota hua dekhen bahut muddat hui ye aarzu karte hue ham ko kabhi manzar kahin ham koi an-dekha hua dekhen sukut-e-sham se pahle ki manzil sakht hoti hai kaho logon se suraj ko na yuun dhalta hua dekhen havaen badban kholin lahu-asar barish ho zamin-e-sakht tujh ko phulta-phalta hua dekhen dhuen ke badalon men chhup gae ujle makan saare ye chaha tha ki manzar shahr ka badla hua dekhen hamari be-hisi pe rone vaala bhi nahin koi chalo jaldi chalo phir shahr ko jalta hua dekhen kahan tak waqt ke dariya ko hum thahra hua dekhen ye hasrat hai ki in aankhon se kuchh hota hua dekhen bahut muddat hui ye aarzu karte hue hum ko kabhi manzar kahin hum koi an-dekha hua dekhen sukut-e-sham se pahle ki manzil sakht hoti hai kaho logon se suraj ko na yun dhalta hua dekhen hawaen baadban kholin lahu-asar barish ho zamin-e-sakht tujh ko phulta-phalta hua dekhen dhuen ke baadalon mein chhup gae ujle makan sare ye chaha tha ki manzar shahr ka badla hua dekhen hamari be-hisi pe rone wala bhi nahin koi chalo jaldi chalo phir shahr ko jalta hua dekhen
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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़
Varun Anand
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ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो
Jaun Elia
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इतना मजबूर न कर बात बनाने लग जाएँ हम तेरे सर की क़सम झूठ ही खाने लग जाएँ इतने सन्नाटे पिए मेरी समा'अत ने कि अब सिर्फ़ आवाज़ पे चाहूँ तो निशाने लग जाएँ चलिए कुछ और नहीं आह-शुमारी ही सही हम किसी काम तो इस दिल के बहाने लग जाएँ हम वो गुम-गश्त-ए-मोहब्बत हैं कि तुम तो क्या हो ख़ुद को हम ढूँडने निकलें तो ज़माने लग जाएँ ख़्वाब कुछ ऐसे दिखाए हैं फ़क़ीरी ने मुझे जिन की ता'बीर में शाहों के ख़ज़ाने लग जाएँ मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मिरे पाँव दबाने लग जाएँ
Mehshar Afridi
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तेरे वादे को कभी झूट नहीं समझूँगा आज की रात भी दरवाज़ा खुला रक्खूँगा देखने के लिए इक चेहरा बहुत होता है आँख जब तक है तुझे सिर्फ़ तुझे देखूँगा मेरी तन्हाई की रुस्वाई की मंज़िल आई वस्ल के लम्हे से मैं हिज्र की शब बदलूँगा शाम होते ही खुली सड़कों की याद आती है सोचता रोज़ हूँ मैं घर से नहीं निकलूँगा ता-कि महफ़ूज़ रहे मेरे क़लम की हुरमत सच मुझे लिखना है मैं हुस्न को सच लिक्खूँगा
Shahryar
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दिल चीज़ क्या है आप मिरी जान लीजिए बस एक बार मेरा कहा मान लीजिए इस अंजुमन में आप को आना है बार बार दीवार-ओ-दर को ग़ौर से पहचान लीजिए माना कि दोस्तों को नहीं दोस्ती का पास लेकिन ये क्या कि ग़ैर का एहसान लीजिए कहिए तो आसमाँ को ज़मीं पर उतार लाएँ मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिए
Shahryar
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