ghazalKuch Alfaaz

वो दर बने या राह की दीवार ख़ुश रहे मैं बस ये चाहता हूँ मेरा यार ख़ुश रहे ऐसा कोई नहीं कि जिसे कोई ग़म नहीं ऐसा कोई नहीं जो लगातार ख़ुश रहे मेहमान रह गया है ये बस चंद रोज़ का कोशिश ये कीजिएगा कि बीमार ख़ुश रहे

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चला है सिलसिला कैसा ये रातों को मनाने का तुम्हें हक़ दे दिया किस ने दियों के दिल दुखाने का इरादा छोड़िए अपनी हदों से दूर जाने का ज़माना है ज़माने की निगाहों में न आने का कहाँ की दोस्ती किन दोस्तों की बात करते हो मियाँ दुश्मन नहीं मिलता कोई अब तो ठिकाने का निगाहों में कोई भी दूसरा चेहरा नहीं आया भरोसा ही कुछ ऐसा था तुम्हारे लौट आने का ये मैं ही था बचा के ख़ुद को ले आया किनारे तक समुंदर ने बहुत मौक़ा' दिया था डूब जाने का

Waseem Barelvi

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क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा

Javed Akhtar

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मेरे बस में नहीं वरना क़ुदरत का लिखा हुआ काटता तेरे हिस्से में आए बुरे दिन कोई दूसरा काटता लारियों से ज़्यादा बहाव था तेरे हर इक लफ्ज़ में मैं इशारा नहीं काट सकता तेरी बात क्या काटता मैं ने भी ज़िंदगी और शब ए हिज्र काटी है सबकी तरह वैसे बेहतर तो ये था के मैं कम से कम कुछ नया काटता तेरे होते हुए मोमबत्ती बुझाई किसी और ने क्या ख़ुशी रह गई थी जन्मदिन की, मैं केक क्या काटता कोई भी तो नहीं जो मेरे भूखे रहने पे नाराज़ हो जेल में तेरी तस्वीर होती तो हँसकर सज़ा काटता

Tehzeeb Hafi

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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

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तुम हक़ीक़त नहीं हो हसरत हो जो मिले ख़्वाब में वो दौलत हो तुम हो ख़ुशबू के ख़्वाब की ख़ुशबू और इतने ही बेमुरव्वत हो किस तरह छोड़ दूँ तुम्हें जानाँ तुम मेरी ज़िन्दगी की आदत हो किसलिए देखते हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो दास्ताँ ख़त्म होने वाली है तुम मेरी आख़िरी मुहब्बत हो

Jaun Elia

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यूँँ भी कटने लगा हूँ अब मैं ग़ैर-मुनासिब यारों से बारिश वफ़ा नहीं कर सकती मिट्टी की दीवारों से दुखे हुए लोगों की दुखती रग को छूना ठीक नहीं वक़्त नहीं पूछा करते हैं यारों वक़्त के मारों से आशिक़ हैं तो आशिक़ वाले जलवे भी दिखलाएँ आप कपड़े फाड़ें ख़ाक़ उड़ाएँ सर मारें दीवारों से और चमन गर अपना है तो इस का सब कुछ अपना है बेशक फूल पे फूल लुटाएँ ख़ार न खाएँ ख़ारों से

Vashu Pandey

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हालात इस कदर न थे दुश्वार ठीक थे चारागरी से क़ब्ल ये बीमार ठीक थे बेकार हो गए हुए हैं जब से कार-गर इस सेे तो मेरी जान हम बेकार ठीक थे उस पार लग रहा था कि इस पार मौज है इस पार सोचते हैं कि उस पार ठीक थे थे यूँँ भी अपने चाहने वाले बहुत कि हम इंसान तो जैसे भी थे फ़नकार ठीक थे

Vashu Pandey

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बड़े बुज़दिल हैं लेकिन फिर भी हिम्मत कर रहे हैं हम तुम्हारे शहर में रह कर मोहब्बत कर रहे हैं हम अभी तक ठीक से आई नहीं है धुन मोहब्बत की गुज़िश्ता सात जन्मों से रियाज़त कर रहे हैं हम तुम्हें कैसा लगेगा गर किसी पिंजरे में रख कर के कोई तुम सेे कहे तेरी हिफ़ाज़त कर रहे हैं हम वगरना जिस को छोड़ा है, उसे मुड़कर नहीं देखा ग़नीमत जान के तुझ सेे शिकायत कर रहे हैं हम मेरे रोने से ख़ाहिफ़ हैं मगर क्या इस सेे वाक़िफ़ हैं कि ये मातम भला किस की बदौलत कर रहे हैं हम

Vashu Pandey

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हम को मुश्किल में रहने दे चारा-गर आसानी से मर जाऍंगे समझा कर अव्वल अव्वल हम भी तेरे जैसे थे हम भी ख़ुश होते थे देख के ख़ुश मंज़र नक़्ल-मकानी शौक़ नहीं मजबूरी थी मैं घर से न चलता कैसे चलता घर उन को बस तन्क़ीद ही करनी होती है उन को क्या मालूम ग़ज़ल के पस मंज़र

Vashu Pandey

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अपना पूरा ज़ोर लगा कर बोल मोहब्बत ज़िन्दाबाद नफ़रत की दीवार गिरा कर बोल मोहब्बत ज़िन्दाबाद इश्क़ के मुनकिर पूछ रहे हैं पहले गर्दन देगा कौन अब तो दोनों हाथ उठा कर बोल मोहब्बत ज़िन्दाबाद तेरी चुप्पी ये साबित कर देगी कि तू बुज़दिल है वरना आँख से आँख मिलाकर बोल मोहब्बत ज़िन्दाबाद इस धरती से उस अंबर तक एक ही नारा गूँजेगा मेरे संग आवाज़ मिलाकर बोल मोहब्बत ज़िन्दाबाद

Vashu Pandey

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