nazmKuch Alfaaz

زندگی کی گنت دل میں آگے کوئی ایڈیشن نہیں ہو سکتا ٹوٹ چکا ہوں کوئی تربیت نہیں ہو سکتا پائیتھاگورس تھیورم تم پر حاوی ہے لو میں کوئی ٹرائینگل نہیں ہو سکتا اب آگے کوئی فریکشن نہیں ہو سکتا آگے کوئی سبسٹرکشن نہیں ہو سکتا ٹریپیجیئم سا چہرہ بنا ڈالا تم نے مجھ کو کہتی ہو پھروں کیوں سکوائر بنو ڈےسی سینٹی ہیکٹو سب نے بولا تھا یہ دل کا اینگل سم پراپرٹی کرواؤ پھروں پروف کروں کہ دونوں سائیڈ سے ایکول ہے جیون میں تو تم نے ہی بوڈماس دیے تھے ان زخموں کا اب سولوشن نہیں ہو سکتا رنجن جیون میں اور میتھ میں کیا انتر دونوں گر قبلہ حاجات جائے تو غصہ آتا ہے

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''चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ'' चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ जो लफ़्ज़ कहूँ वो हो जाए बस अश्क कहूँ तो एक आँसू तेरे गोरे गाल को धो जाए मैं आ लिक्खूँ तू आ जाए मैं बैठ लिक्खूँ तू आ बैठे मेरे शाने पर सर रक्खे तू मैं नींद कहूँ तू सो जाए मैं काग़ज़ पर तेरे होंठ लिक्खूँ तेरे होंठों पर मुस्कान आए मैं दिल लिक्खूँ तू दिल था में मैं गुम लिक्खूँ वो खो जाए तेरे हाथ बनाऊँ पेंसिल से फिर हाथ पे तेरे हाथ रखूँ कुछ उल्टा सीधा फ़र्ज़ करूँँ कुछ सीधा उल्टा हो जाए मैं आह लिखूँ तू हाए करे बेचैन लिखूँ बेचैन हो तू फिर बेचैन का बे काटूँ तुझे चैन ज़रा सा हो जाए अभी ऐन लिखूँ तू सोचे मुझे फिर शीन लिखूँ तेरी नींद उड़े जब क़ाफ़ लिखूँ तुझे कुछ कुछ हो मैं इश्क़ लिखूँ तुझे हो जाए

Amir Ameer

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جذبات جو یہ آنکھوں سے بہ رہا ہے کتنے ہم لاچار ہے جاناں سمجھو تو انتظار ہے ورنا کوئی انتظار نہیں تمہاری یاد ہے وہ ہے وہ ایسے ڈوبا چنو کوئی بیمار ہے جاناں سمجھو تو بے قرار ہے ورنا کوئی بے قرار نہیں جو مری دھڑکن چل رہی ہے ان ہے وہ ہے وہ ہے وہ ب سے تمہارا نام ہے جاناں سمجھو تو یہ پکار ہے ورنا کوئی پکار نہیں ان ہاتھوں سے تمہاری زلفیں سنو ارنی ہیں ہر شام تمہارے ساتھ گزار لگ ہے جاناں سمجھو تو یہ دلار ہے ورنا کوئی دلار نہیں تمہارے ب سے دل ہے وہ ہے وہ جگہ نہیں تمہاری روح سے رشتہ چاہیے جاناں سمجھو تو یہ آر پار ہے ورنا کچھ آر پار نہیں تمہیں مل تو جائےگا مجھ سے اچھا سامنے تمہارے تو قطار ہے تمہیں پتا ہے نا تمہاری چاہت کا ب سے ایک حق دار ہے باقی کوئی حق دار نہیں تمہاری بان ہوں ہے وہ ہے وہ ہی سکون ملےگا مجھے سچ ک ہوں تو درکار ہے جاناں سمجھو تو یہ بہار ہے ورنا کہی بہار نہیں تمہاری گود ہے وہ ہے وہ آرام چاہیے تمہاری آواز ہے وہ ہے وہ ب سے اپنا نام چاہیے جاناں سمجھو تو یہ قرار ہے<br

Divya 'Kumar Sahab'

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"हम मिलेंगे कहीं" हम मिलेंगे कहीं अजनबी शहर की ख़्वाब होती हुई शाहराओं पे और शाहराओं पे फैली हुई धूप में एक दिन हम कहीं साथ होगे वक़्त की आँधियों से अटी साहतों पर से मिट्टी हटाते हुए एक ही जैसे आँसू बहाते हुए हम मिलेंगे घने जंगलो की हरी घास पर और किसी शाख़-ए-नाज़ुक पर पड़ते हुए बोझ की दास्तानों में खो जाएँगे हम सनोबर के पेड़ों की नोकीले पत्तों से सदियों से सोए हुए देवताओं की आँखें चभो जाएँगे हम मिलेंगे कहीं बर्फ़ के बाजुओं में घिरे पर्वतों पर बाँझ क़ब्रो में लेटे हुए कोह पेमाओं की याद में नज़्म कहते हुए जो पहाड़ों की औलाद थे, और उन्हें वक़्त आने पर माँ बाप ने अपनी आग़ोश में ले लिया हम मिलेंगे कही शाह सुलेमान के उर्स में हौज़ की सीढियों पर वज़ू करने वालो के शफ़्फ़ाफ़ चेहरों के आगे संगेमरमर से आरस्ता फ़र्श पर पैर रखते हुए आह भरते हुए और दरख़्तों को मन्नत के धागो से आज़ाद करते हुए हम मिलेंगे हम मिलेंगे कहीं नार मेंडी के साहिल पे आते हुए अपने गुम गश्तरश्तो की ख़ाक-ए-सफ़र से अटी वर्दियों के निशाँ देख कर मराकिस से पलटे हुए एक जर्नेल की आख़िरी बात पर मुस्कुराते हुए इक जहाँ जंग की चोट खाते हुए हम मिलेंगे हम मिलेंगे कहीं रूस की दास्ताओं की झूठी कहानी पे आँखों में हैरत सजाए हुए, शाम लेबनान बेरूत की नरगिसी चश्मूरों की आमद के नोहू पे हँसते हुए, ख़ूनी कज़ियो से मफ़लूह जलबानियाँ के पहाड़ी इलाक़ों में मेहमान बन कर मिलेंगे हम मिलेंगे एक मुर्दा ज़माने की ख़ुश रंग तहज़ीब में ज़स्ब होने के इमकान में इक पुरानी इमारत के पहलू में उजड़े हुए लाँन में और अपने असीरों की राह देखते पाँच सदियों से वीरान ज़िंदान में हम मिलेंगे तमन्नाओं की छतरियों के तले, ख़्वाहिशों की हवाओं के बेबाक बोसो से छलनी बदन सौंपने के लिए रास्तों को हम मिलेंगे ज़मीं से नमूदार होते हुए आठवें बर्रे आज़म में उड़ते हुए कालीन पर हम मिलेंगे किसी बार में अपनी बकाया बची उम्र की पायमाली के जाम हाथ में लेंगे और एक ही घूंट में हम ये सैयाल अंदर उतारेंगे और होश आने तलक गीत गायेंगे बचपन के क़िस्से सुनाता हुआ गीत जो आज भी हम को अज़बर है बेड़ी बे बेड़ी तू ठिलदी तपईये पते पार क्या है पते पार क्या है? हम मिलेंगे बाग़ में, गाँव में, धूप में, छाँव में, रेत में, दश्त में, शहर में, मस्जिदों में, कलीसो में, मंदिर में, मेहराब में, चर्च में, मूसलाधार बारिश में, बाज़ार में, ख़्वाब में, आग में, गहरे पानी में, गलियों में, जंगल में और आसमानों में कोनो मकाँ से परे गैर आबद सैयाराए आरज़ू में सदियों से ख़ाली पड़ी बेंच पर जहाँ मौत भी हम से दस्तो गरेबाँ होगी, तो बस एक दो दिन की मेहमान होगी

Tehzeeb Hafi

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رمز جاناں جب آوگی تو کھویا ہوا پاؤ گی مجھے مری تنہائی ہے وہ ہے وہ خوابوں کے سوا کچھ بھی نہیں مری کمرے کو سجانے کی تمنا ہے تمہیں مری کمرے ہے وہ ہے وہ کتابوں کے سوا کچھ بھی نہیں ان کتابوں نے بڑا ظلم کیا ہے مجھ پر ان ہے وہ ہے وہ اک رمز ہے ج سے رمز کا مارا ہوا ذہن مژدہ عشرت انجام نہیں پا سکتا زندگی ہے وہ ہے وہ کبھی آرام نہیں پا سکتا

Jaun Elia

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یاد ہے پہلے روز کہا تھا یاد ہے پہلے روز کہا تھا پھروں نہ کہنا غلطی دل کی پیار سمجھ کے کرنا لڑکی پیار نبھانا ہوتا ہے پھروں پار لگانا ہوتا ہے یاد ہے پہلے روز کہا تھا ساتھ چلو تو پورے سفر تک مر جانے کی اگلی خبر تک سمجھو یار خدا تک ہوگا سارا پیار وفا تک ہوگا پھروں یہ بندھن توڑ نہ جانا چھوڑ گئے تو پھروں نہ آنا چھوڑ دیا جو تیرا نہیں ہے چلا گیا جو میرا نہیں ہے یاد ہے پہلے روز کہا تھا یا تو ٹوٹ کے پیار نہ کرنا یا پھروں پیٹھ پہ وار نہ کرنا جب نادانی ہو جاتی ہے نئی کہانی ہو جاتی ہے نئی کہانی لکھ لاوں گا اگلے روز میں بک جاؤں گا تیرے گل جب کھیل جائیں گے مجھ کو پیسے مل جائیں گے یاد ہے پہلے روز کہا تھا بچھڑ گئے تو موج اڑانا واپس میرے پاس نہ آنا جب کوئی جا کر واپس آئے روئے تڑپے یا پچھتائے میں پھروں اس کو ملتا نہیں ہوں ساتھ دوبارہ چلتا نہیں ہوں گم جاتا ہوں کھو جاتا ہوں میں پتھر کا ہو جاتا ہوں

Khalil Ur Rehman Qamar

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آنکھیں مچلتی جھیل سی مانو کوئی دریا ہے یہ آنکھیں تمہارے دل کو جانے کا کوئی ذریعہ ہے یہ آنکھیں تمہارے بال اوپر سے یہ مانو رشک کرتے ہیں جہاں سے خوبصورت ہے بہت بڑھیا ہیں یہ آنکھیں مجھے حیران کرتی ہے میرے خوابوں ہے وہ ہے وہ آ کر کے کبھی مجھ کو ڈراتی ہے مجھے غصہ دکھا کر کے خوشی سے جھوم جاتا ہوں اگر حقیقت سامنے ہوں تو جہاں ہے وہ ہے وہ ہے نہیں دوجا میرے محبوب سی آنکھیں نہ سوتا ہوں نہ روتا ہوں اسے ہی یاد کرتا ہوں نہ جانے بن گئی کیسے مری دنیا وہی آنکھیں بھروسا تھا وہی آنکھیں تو جستجو دل شکستہ ہے اسمبھو تھا بھلا کیسا یہ جادو کر گیا تو معشوق کی آنکھیں نظر سے دکھ ہی جاتا ہے دلوں ہے وہ ہے وہ کھلبلی ہوں تو زمانہ پوچھتا ہے اب بنےگا آ سے کیا آنکھیں جسے آنکھیں دکھاتے ہوں وہی تو رہنما تھا پھروں سمے بدلا تو پتھر بن گئی دیکھو کئی آنکھیں کبھی تو سوچ لو ان کا جو جاناں سے دور بیٹھے ہیں حقیقت آنکھیں کہ رہی ہے دیکھ لینا آئےگا اک دن جو مجھ سے دور رہتا ہے میری آنکھیں بنےگا حقیقت حقیقت بوڑھا آدمی ہے آ سے ہے و

ABHISHEK RANJAN

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माँ मेरी ख़्वाहिश मेरी माता मेरा जीवन मेरी माता अगर आया हूँ दुनिया में वो ज़रिया हैं मेरी माता जो मेरी बात करती हैं ज़माने से भी लड़ जाऍं मुझे दर्पण दिखाती हैं ग़लत क्या है सही क्या है मुझे ग़ुस्सा दिखाती हैं मुझे पुचकारती भी हैं मगर दिल की वो सच्ची हैं वो जग में सब सेे अच्छी हैं मेरे अरमान के ख़ातिर वो आधी पेट खाती है वो ख़ुद का ग़म छुपाती हैं मुझे हँस के दिखाती हैं उन्हें उम्मीद है मुझ सेे करूँँगा नाम मैं रौशन बनूँगा शान मैं उन का उन्हीं के राह पे चल कर कभी जो टूट जाता हूँ सफ़र में छूट जाता हूँ वही इक हाथ देती हैं मुझे गिरने नहीं देती वो कहती हैं मेरे बेटे करो मेहनत रखो हिम्मत करो कोशिश सदा हरदम अभी उम्मीद मत हारो ज़रा सी आँधियाँ हैं ये तुम्हारा क्या बिगाड़ेंगी यक़ीनन चंद लम्हों में तुम्हें मंज़िल बुलाएगी वही जो दूर है तुम सेे वही फिर पास आएँगे जो रिश्ता तोड़ बैठे हैं वही अपना बुलाएँगे समय का खेल है सब कुछ समय ही सब बताएगा क़दम रोको नहीं इक दिन यही मंज़िल दिलाएगा भला कैसे बता रंजन ग़लत का रास्ता चुनता हाँ माँ के आँख में आँसू भला क्या देख सकता है

ABHISHEK RANJAN

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ہے وہ ہے وہ ہے وہ مجھے معلوم ہے یہ ہے وہ ہے وہ ک ہاں ہوں ابھی تنہائیوں ہے وہ ہے وہ جی رہا ہوں حقیقت لڑکا کچھ نہیں کر پائے گا اب یہ تہمت مسکرا کے لکھ رہا ہوں دیوالی ہے وہ ہے وہ بھی گھر سنسان میرا قاف یوں پرچھائیوں کا یک ج ہاں ہوں تمہارے بعد دیکھو کیا ہوا ہے ہے وہ ہے وہ ہے وہ اپنی موت کے دن گن رہا ہوں جو محنت کر رہے ہوں شفت مت ہے وہ ہے وہ ہے وہ قسمت کا نہیں تیرا ج ہاں ہوں کہےگا کون ا سے حالت ہے وہ ہے وہ رنجن ذرا ٹھہرو ہے وہ ہے وہ تیرا ہم ر ہاں ہوں

ABHISHEK RANJAN

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मेरी वाली नज़रों ही नज़रों में बातें करती है अपने ही धुन में वो खोई रहती है पैसा दौलत की उस को परवाह नहीं इश्क़ में सच्चा मजनूॅं उस को भाता है लंबी है माना पर दिल की सच्ची है जैसी भी हो मेरी वाली अच्छी है ज़ुल्फ़ बिखेरे गलियों में जब घू में वो ख़्वाहिश मेरी मेरा माथा चू में वो मैं रक्खूॅं रोज़ा वो भी उपवास करे हर लम्हा हर पल वो मेरे साथ रहे मुझ को देखे मुझ को सोचे बात करे मेरे ही ख़्वाबों में वो दिन रात करे ऐ मालिक तू मेरा उस को कर देना हाथ में मेहॅंदी मेरे नाम की भर देना

ABHISHEK RANJAN

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توبہ ہے رنجن کل سے سب چیزوں سے توبہ ہے مجھ کو ا سے کی اذیت ناک سے توبہ ہے میرا ہوں کے نہیں میرا جو بن پائے مجھ کو ہاں ایسے لوگوں سے توبہ ہے دکھلانا ہے مجھ کو سیرت دکھلاؤ پیاری منموہک شکلوں سے توبہ ہے کب تک وعدہ کر کے نہیں نبھائیں گے دیش کی ہاں ان غداروں سے توبہ ہے پیار ہے وہ ہے وہ ہارے لڑکے مری بات سنے اب سے ان سستے ہیروں سے توبہ ہے چھوڑو بھی اب کتنا آگے جاؤگے رنجن تیری لمبی نظموں سے توبہ ہے

ABHISHEK RANJAN

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