زندگی کی گنت دل میں آگے کوئی ایڈیشن نہیں ہو سکتا ٹوٹ چکا ہوں کوئی تربیت نہیں ہو سکتا پائیتھاگورس تھیورم تم پر حاوی ہے لو میں کوئی ٹرائینگل نہیں ہو سکتا اب آگے کوئی فریکشن نہیں ہو سکتا آگے کوئی سبسٹرکشن نہیں ہو سکتا ٹریپیجیئم سا چہرہ بنا ڈالا تم نے مجھ کو کہتی ہو پھروں کیوں سکوائر بنو ڈےسی سینٹی ہیکٹو سب نے بولا تھا یہ دل کا اینگل سم پراپرٹی کرواؤ پھروں پروف کروں کہ دونوں سائیڈ سے ایکول ہے جیون میں تو تم نے ہی بوڈماس دیے تھے ان زخموں کا اب سولوشن نہیں ہو سکتا رنجن جیون میں اور میتھ میں کیا انتر دونوں گر قبلہ حاجات جائے تو غصہ آتا ہے
Related Nazm
''चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ'' चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ जो लफ़्ज़ कहूँ वो हो जाए बस अश्क कहूँ तो एक आँसू तेरे गोरे गाल को धो जाए मैं आ लिक्खूँ तू आ जाए मैं बैठ लिक्खूँ तू आ बैठे मेरे शाने पर सर रक्खे तू मैं नींद कहूँ तू सो जाए मैं काग़ज़ पर तेरे होंठ लिक्खूँ तेरे होंठों पर मुस्कान आए मैं दिल लिक्खूँ तू दिल था में मैं गुम लिक्खूँ वो खो जाए तेरे हाथ बनाऊँ पेंसिल से फिर हाथ पे तेरे हाथ रखूँ कुछ उल्टा सीधा फ़र्ज़ करूँँ कुछ सीधा उल्टा हो जाए मैं आह लिखूँ तू हाए करे बेचैन लिखूँ बेचैन हो तू फिर बेचैन का बे काटूँ तुझे चैन ज़रा सा हो जाए अभी ऐन लिखूँ तू सोचे मुझे फिर शीन लिखूँ तेरी नींद उड़े जब क़ाफ़ लिखूँ तुझे कुछ कुछ हो मैं इश्क़ लिखूँ तुझे हो जाए
Amir Ameer
295 likes
جذبات جو یہ آنکھوں سے بہ رہا ہے کتنے ہم لاچار ہے جاناں سمجھو تو انتظار ہے ورنا کوئی انتظار نہیں تمہاری یاد ہے وہ ہے وہ ایسے ڈوبا چنو کوئی بیمار ہے جاناں سمجھو تو بے قرار ہے ورنا کوئی بے قرار نہیں جو مری دھڑکن چل رہی ہے ان ہے وہ ہے وہ ہے وہ ب سے تمہارا نام ہے جاناں سمجھو تو یہ پکار ہے ورنا کوئی پکار نہیں ان ہاتھوں سے تمہاری زلفیں سنو ارنی ہیں ہر شام تمہارے ساتھ گزار لگ ہے جاناں سمجھو تو یہ دلار ہے ورنا کوئی دلار نہیں تمہارے ب سے دل ہے وہ ہے وہ جگہ نہیں تمہاری روح سے رشتہ چاہیے جاناں سمجھو تو یہ آر پار ہے ورنا کچھ آر پار نہیں تمہیں مل تو جائےگا مجھ سے اچھا سامنے تمہارے تو قطار ہے تمہیں پتا ہے نا تمہاری چاہت کا ب سے ایک حق دار ہے باقی کوئی حق دار نہیں تمہاری بان ہوں ہے وہ ہے وہ ہی سکون ملےگا مجھے سچ ک ہوں تو درکار ہے جاناں سمجھو تو یہ بہار ہے ورنا کہی بہار نہیں تمہاری گود ہے وہ ہے وہ آرام چاہیے تمہاری آواز ہے وہ ہے وہ ب سے اپنا نام چاہیے جاناں سمجھو تو یہ قرار ہے<br
Divya 'Kumar Sahab'
37 likes
"हम मिलेंगे कहीं" हम मिलेंगे कहीं अजनबी शहर की ख़्वाब होती हुई शाहराओं पे और शाहराओं पे फैली हुई धूप में एक दिन हम कहीं साथ होगे वक़्त की आँधियों से अटी साहतों पर से मिट्टी हटाते हुए एक ही जैसे आँसू बहाते हुए हम मिलेंगे घने जंगलो की हरी घास पर और किसी शाख़-ए-नाज़ुक पर पड़ते हुए बोझ की दास्तानों में खो जाएँगे हम सनोबर के पेड़ों की नोकीले पत्तों से सदियों से सोए हुए देवताओं की आँखें चभो जाएँगे हम मिलेंगे कहीं बर्फ़ के बाजुओं में घिरे पर्वतों पर बाँझ क़ब्रो में लेटे हुए कोह पेमाओं की याद में नज़्म कहते हुए जो पहाड़ों की औलाद थे, और उन्हें वक़्त आने पर माँ बाप ने अपनी आग़ोश में ले लिया हम मिलेंगे कही शाह सुलेमान के उर्स में हौज़ की सीढियों पर वज़ू करने वालो के शफ़्फ़ाफ़ चेहरों के आगे संगेमरमर से आरस्ता फ़र्श पर पैर रखते हुए आह भरते हुए और दरख़्तों को मन्नत के धागो से आज़ाद करते हुए हम मिलेंगे हम मिलेंगे कहीं नार मेंडी के साहिल पे आते हुए अपने गुम गश्तरश्तो की ख़ाक-ए-सफ़र से अटी वर्दियों के निशाँ देख कर मराकिस से पलटे हुए एक जर्नेल की आख़िरी बात पर मुस्कुराते हुए इक जहाँ जंग की चोट खाते हुए हम मिलेंगे हम मिलेंगे कहीं रूस की दास्ताओं की झूठी कहानी पे आँखों में हैरत सजाए हुए, शाम लेबनान बेरूत की नरगिसी चश्मूरों की आमद के नोहू पे हँसते हुए, ख़ूनी कज़ियो से मफ़लूह जलबानियाँ के पहाड़ी इलाक़ों में मेहमान बन कर मिलेंगे हम मिलेंगे एक मुर्दा ज़माने की ख़ुश रंग तहज़ीब में ज़स्ब होने के इमकान में इक पुरानी इमारत के पहलू में उजड़े हुए लाँन में और अपने असीरों की राह देखते पाँच सदियों से वीरान ज़िंदान में हम मिलेंगे तमन्नाओं की छतरियों के तले, ख़्वाहिशों की हवाओं के बेबाक बोसो से छलनी बदन सौंपने के लिए रास्तों को हम मिलेंगे ज़मीं से नमूदार होते हुए आठवें बर्रे आज़म में उड़ते हुए कालीन पर हम मिलेंगे किसी बार में अपनी बकाया बची उम्र की पायमाली के जाम हाथ में लेंगे और एक ही घूंट में हम ये सैयाल अंदर उतारेंगे और होश आने तलक गीत गायेंगे बचपन के क़िस्से सुनाता हुआ गीत जो आज भी हम को अज़बर है बेड़ी बे बेड़ी तू ठिलदी तपईये पते पार क्या है पते पार क्या है? हम मिलेंगे बाग़ में, गाँव में, धूप में, छाँव में, रेत में, दश्त में, शहर में, मस्जिदों में, कलीसो में, मंदिर में, मेहराब में, चर्च में, मूसलाधार बारिश में, बाज़ार में, ख़्वाब में, आग में, गहरे पानी में, गलियों में, जंगल में और आसमानों में कोनो मकाँ से परे गैर आबद सैयाराए आरज़ू में सदियों से ख़ाली पड़ी बेंच पर जहाँ मौत भी हम से दस्तो गरेबाँ होगी, तो बस एक दो दिन की मेहमान होगी
Tehzeeb Hafi
236 likes
رمز جاناں جب آوگی تو کھویا ہوا پاؤ گی مجھے مری تنہائی ہے وہ ہے وہ خوابوں کے سوا کچھ بھی نہیں مری کمرے کو سجانے کی تمنا ہے تمہیں مری کمرے ہے وہ ہے وہ کتابوں کے سوا کچھ بھی نہیں ان کتابوں نے بڑا ظلم کیا ہے مجھ پر ان ہے وہ ہے وہ اک رمز ہے ج سے رمز کا مارا ہوا ذہن مژدہ عشرت انجام نہیں پا سکتا زندگی ہے وہ ہے وہ کبھی آرام نہیں پا سکتا
Jaun Elia
216 likes
یاد ہے پہلے روز کہا تھا یاد ہے پہلے روز کہا تھا پھروں نہ کہنا غلطی دل کی پیار سمجھ کے کرنا لڑکی پیار نبھانا ہوتا ہے پھروں پار لگانا ہوتا ہے یاد ہے پہلے روز کہا تھا ساتھ چلو تو پورے سفر تک مر جانے کی اگلی خبر تک سمجھو یار خدا تک ہوگا سارا پیار وفا تک ہوگا پھروں یہ بندھن توڑ نہ جانا چھوڑ گئے تو پھروں نہ آنا چھوڑ دیا جو تیرا نہیں ہے چلا گیا جو میرا نہیں ہے یاد ہے پہلے روز کہا تھا یا تو ٹوٹ کے پیار نہ کرنا یا پھروں پیٹھ پہ وار نہ کرنا جب نادانی ہو جاتی ہے نئی کہانی ہو جاتی ہے نئی کہانی لکھ لاوں گا اگلے روز میں بک جاؤں گا تیرے گل جب کھیل جائیں گے مجھ کو پیسے مل جائیں گے یاد ہے پہلے روز کہا تھا بچھڑ گئے تو موج اڑانا واپس میرے پاس نہ آنا جب کوئی جا کر واپس آئے روئے تڑپے یا پچھتائے میں پھروں اس کو ملتا نہیں ہوں ساتھ دوبارہ چلتا نہیں ہوں گم جاتا ہوں کھو جاتا ہوں میں پتھر کا ہو جاتا ہوں
Khalil Ur Rehman Qamar
191 likes
More from ABHISHEK RANJAN
آنکھیں مچلتی جھیل سی مانو کوئی دریا ہے یہ آنکھیں تمہارے دل کو جانے کا کوئی ذریعہ ہے یہ آنکھیں تمہارے بال اوپر سے یہ مانو رشک کرتے ہیں جہاں سے خوبصورت ہے بہت بڑھیا ہیں یہ آنکھیں مجھے حیران کرتی ہے میرے خوابوں ہے وہ ہے وہ آ کر کے کبھی مجھ کو ڈراتی ہے مجھے غصہ دکھا کر کے خوشی سے جھوم جاتا ہوں اگر حقیقت سامنے ہوں تو جہاں ہے وہ ہے وہ ہے نہیں دوجا میرے محبوب سی آنکھیں نہ سوتا ہوں نہ روتا ہوں اسے ہی یاد کرتا ہوں نہ جانے بن گئی کیسے مری دنیا وہی آنکھیں بھروسا تھا وہی آنکھیں تو جستجو دل شکستہ ہے اسمبھو تھا بھلا کیسا یہ جادو کر گیا تو معشوق کی آنکھیں نظر سے دکھ ہی جاتا ہے دلوں ہے وہ ہے وہ کھلبلی ہوں تو زمانہ پوچھتا ہے اب بنےگا آ سے کیا آنکھیں جسے آنکھیں دکھاتے ہوں وہی تو رہنما تھا پھروں سمے بدلا تو پتھر بن گئی دیکھو کئی آنکھیں کبھی تو سوچ لو ان کا جو جاناں سے دور بیٹھے ہیں حقیقت آنکھیں کہ رہی ہے دیکھ لینا آئےگا اک دن جو مجھ سے دور رہتا ہے میری آنکھیں بنےگا حقیقت حقیقت بوڑھا آدمی ہے آ سے ہے و
ABHISHEK RANJAN
0 likes
माँ मेरी ख़्वाहिश मेरी माता मेरा जीवन मेरी माता अगर आया हूँ दुनिया में वो ज़रिया हैं मेरी माता जो मेरी बात करती हैं ज़माने से भी लड़ जाऍं मुझे दर्पण दिखाती हैं ग़लत क्या है सही क्या है मुझे ग़ुस्सा दिखाती हैं मुझे पुचकारती भी हैं मगर दिल की वो सच्ची हैं वो जग में सब सेे अच्छी हैं मेरे अरमान के ख़ातिर वो आधी पेट खाती है वो ख़ुद का ग़म छुपाती हैं मुझे हँस के दिखाती हैं उन्हें उम्मीद है मुझ सेे करूँँगा नाम मैं रौशन बनूँगा शान मैं उन का उन्हीं के राह पे चल कर कभी जो टूट जाता हूँ सफ़र में छूट जाता हूँ वही इक हाथ देती हैं मुझे गिरने नहीं देती वो कहती हैं मेरे बेटे करो मेहनत रखो हिम्मत करो कोशिश सदा हरदम अभी उम्मीद मत हारो ज़रा सी आँधियाँ हैं ये तुम्हारा क्या बिगाड़ेंगी यक़ीनन चंद लम्हों में तुम्हें मंज़िल बुलाएगी वही जो दूर है तुम सेे वही फिर पास आएँगे जो रिश्ता तोड़ बैठे हैं वही अपना बुलाएँगे समय का खेल है सब कुछ समय ही सब बताएगा क़दम रोको नहीं इक दिन यही मंज़िल दिलाएगा भला कैसे बता रंजन ग़लत का रास्ता चुनता हाँ माँ के आँख में आँसू भला क्या देख सकता है
ABHISHEK RANJAN
0 likes
ہے وہ ہے وہ ہے وہ مجھے معلوم ہے یہ ہے وہ ہے وہ ک ہاں ہوں ابھی تنہائیوں ہے وہ ہے وہ جی رہا ہوں حقیقت لڑکا کچھ نہیں کر پائے گا اب یہ تہمت مسکرا کے لکھ رہا ہوں دیوالی ہے وہ ہے وہ بھی گھر سنسان میرا قاف یوں پرچھائیوں کا یک ج ہاں ہوں تمہارے بعد دیکھو کیا ہوا ہے ہے وہ ہے وہ ہے وہ اپنی موت کے دن گن رہا ہوں جو محنت کر رہے ہوں شفت مت ہے وہ ہے وہ ہے وہ قسمت کا نہیں تیرا ج ہاں ہوں کہےگا کون ا سے حالت ہے وہ ہے وہ رنجن ذرا ٹھہرو ہے وہ ہے وہ تیرا ہم ر ہاں ہوں
ABHISHEK RANJAN
0 likes
मेरी वाली नज़रों ही नज़रों में बातें करती है अपने ही धुन में वो खोई रहती है पैसा दौलत की उस को परवाह नहीं इश्क़ में सच्चा मजनूॅं उस को भाता है लंबी है माना पर दिल की सच्ची है जैसी भी हो मेरी वाली अच्छी है ज़ुल्फ़ बिखेरे गलियों में जब घू में वो ख़्वाहिश मेरी मेरा माथा चू में वो मैं रक्खूॅं रोज़ा वो भी उपवास करे हर लम्हा हर पल वो मेरे साथ रहे मुझ को देखे मुझ को सोचे बात करे मेरे ही ख़्वाबों में वो दिन रात करे ऐ मालिक तू मेरा उस को कर देना हाथ में मेहॅंदी मेरे नाम की भर देना
ABHISHEK RANJAN
0 likes
توبہ ہے رنجن کل سے سب چیزوں سے توبہ ہے مجھ کو ا سے کی اذیت ناک سے توبہ ہے میرا ہوں کے نہیں میرا جو بن پائے مجھ کو ہاں ایسے لوگوں سے توبہ ہے دکھلانا ہے مجھ کو سیرت دکھلاؤ پیاری منموہک شکلوں سے توبہ ہے کب تک وعدہ کر کے نہیں نبھائیں گے دیش کی ہاں ان غداروں سے توبہ ہے پیار ہے وہ ہے وہ ہارے لڑکے مری بات سنے اب سے ان سستے ہیروں سے توبہ ہے چھوڑو بھی اب کتنا آگے جاؤگے رنجن تیری لمبی نظموں سے توبہ ہے
ABHISHEK RANJAN
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on ABHISHEK RANJAN.
Similar Moods
More moods that pair well with ABHISHEK RANJAN's nazm.







