ऐ सफ़-ए-अब्र-ए-रवाँ तेरे बा'द इक घना साया शजर से निकला
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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सफ़र में आख़िरी पत्थर के बा'द आएगा मज़ा तो यार दिसंबर के बा'द आएगा
Rahat Indori
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यार बिछड़ कर तुम ने हँसता बसता घर वीरान किया मुझ को भी आबाद न रक्खा अपना भी नुक़्सान किया
Ali Zaryoun
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मैं तेरे बा'द कोई तेरे जैसा ढूँढ़ता हूँ जो बे-वफ़ाई करे और बे-वफ़ा न लगे
Abbas Tabish
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वो एक अक्स कि पल भर नज़र में ठहरा था तमाम उम्र का अब सिलसिला है मेरे लिए
Rajinder Manchanda Bani
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वो टूटते हुए रिश्तों का हुस्न-ए-आख़िर था कि चुप सी लग गई दोनों को बात करते हुए
Rajinder Manchanda Bani
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ज़रा छुआ था कि बस पेड़ आ गिरा मुझ पर कहाँ ख़बर थी कि अंदर से खोखला है बहुत
Rajinder Manchanda Bani
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तू कोई ग़म है तो दिल में जगह बना अपनी तू इक सदा है तो एहसास की कमाँ से निकल
Rajinder Manchanda Bani
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मैं हूँ और वादा-ए-फ़र्दा तेरा और इक उम्र पड़ी हो जैसे
Rajinder Manchanda Bani
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