हिम्मत से सच कहो तो बुरा मानते हैं लोग रो-रो के बात कहने की आदत नहीं रही
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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यहाँ दरख़्तों के साए में धूप लगती है चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए
Dushyant Kumar
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ये सच है कि पाँवों ने बहुत कष्ट उठाए पर पाँव किसी तरह राहों पे तो आए
Dushyant Kumar
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धूप ये अठखेलियाँ हर रोज़ करती है एक छाया सीढ़ियाँ चढ़ती उतरती है ये दिया चौरास्ते का ओट में ले लो आज आँधी गाँव से हो कर गुज़रती है
Dushyant Kumar
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फिरता है कैसे-कैसे सवालों के साथ वो उस आदमी की जामा-तलाशी तो लीजिए
Dushyant Kumar
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आप दस्ताने पहनकर छू रहे हैं आग को आप के भी ख़ून का रंग हो गया है साँवला
Dushyant Kumar
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