किसी इक बे-वफ़ा पे दिल जो हारा था वही हाँ मर गया जो ग़म का मारा था हमारा जिस्म ज़ख़्मी होना लाज़िम था ज़मीं से आसमाँ को ढेला मारा था किसी गड्ढे में लाज़िम था मेरा गिरना ज़मीं से चाँद जो मैं ने निहारा था बहुत ही देर कर दी लौटने में यार ख़ुदा का हो गया वो जो तुम्हारा था ख़ुदा को प्यारा होगा किस को था मालूम जो तुम को हम को उस को सब को प्यारा था
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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ज़मीन है तुम सेे घर है बाबू जी वरना सब काग़ज़ भर है बाबू जी फख़्र से अपने सर को उठा के चलिए आप का लड़का शाइ'र है बाबू जी
Irshad Siddique "Shibu"
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काम नहीं शैतानों का अब दुनिया में इंसानों से हैं इंसान परेशान यहाँ
Irshad Siddique "Shibu"
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इस तरह से उस ने मुझ को याद रक्खा है नाम अपने बेटे का इरशाद रक्खा है
Irshad Siddique "Shibu"
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तू हो कर भी साथ मिरा नइँ होता क्या ये मेरे साथ बुरा नइँ होता पत्थर पत्थर होता है और कुछ नइँ रब का कोई चेहरा वेहरा नइँ होता
Irshad Siddique "Shibu"
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उस की हर मर्ज़ी में मैं शामिल हुआ फिर भी मेरा इश्क़ ना-कामिल हुआ
Irshad Siddique "Shibu"
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