साग़र-ए-मय नहीं है हाथों में हाथ में क़ायनात है साक़ी
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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महताब तेरे रुख़ की ज़ियारत का नाम है सिंदूर तेरी माँग का उल्फ़त का नाम है
Parvez Zaami
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कहते हैं लोग जिस को सनम बादा-ए-इरम वो तो तिरे लबों की हलावत का नाम है
Parvez Zaami
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सोचता हूँ तिरे अलावा तो ये क़लम मुझ से रूठ जाती है
Parvez Zaami
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लोग रोते हैं किसलिए 'ज़ामी' मौत तो इल्तिफ़ात होती है
Parvez Zaami
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ज़िंदगी नाम है अज़िय्यत का ज़ीस्त में ग़म नहीं तो कुछ भी नहीं
Parvez Zaami
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