तिरा दीदार हो जाता मगर अफ़सोस है इस पर कभी कुछ काम ले डूबा कभी आराम ले डूबा
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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सुहागन भी बता देगी मगर तुम पूछो विधवा से ये मंगलसूत्र ज़ेवर के अलावा भी बहुत कुछ है ये क्या इक मक़बरे को आख़री हद मान बैठे हो मोहब्बत संग-ए-मरमर के अलावा भी बहुत कुछ है
Zubair Ali Tabish
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ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
Mehshar Afridi
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तू जो हर रोज़ नए हुस्न पे मर जाता है तू बताएगा मुझे इश्क़ है क्या जाने दे
Ali Zaryoun
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ज़िन्दगी भर यही इक काम किया है मैं ने अपने दुख दर्द को नीलाम किया है मैं ने जुर्म समझा है जिसे अहले-ख़िरद ने शादाब हाँ वही जुर्म सरे-आम किया है मैं ने
Shadab Shabbiri
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ज़मीं नीचे न ऊपर आसमाँ है कहाँ हम लोग लाए जा रहे हैं
Shadab Shabbiri
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तुम वाह तो करते हो मगर तंज़ मिला कर हम आह भी करते हैं तो इक ख़ास तरह से
Shadab Shabbiri
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वो बहुत ही महान है भाई ये फ़क़त इक गुमान है भाई
Shadab Shabbiri
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थी किताबी किताब में गुज़री ज़िन्दगी सारी ख़्वाब में गुज़री उस के दरबार से रहा रिश्ता उम्र बस जी जनाब में गुज़री
Shadab Shabbiri
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