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agar hai manzur ye ki hove hamare siine ka daaghh thanda to aa lipatiye gale se ai jaan jhamak se kar jhap charaghh thanda ham aur tum jaan ab is qadar to mohabbaton men hain ek tan man lagaya tum ne jabin pe sandal hua hamara dimaghh thanda labon se lagte hi ho gai thi tamam sardi dil-o-jigar men diya tha saaqi ne raat ham ko kuchh aise mai ka ayaghh thanda darakht bhige hain kal ke menh se chaman chaman men bhara hai paani jo sair kiije to aaj sahab ajab tarah ka hai baaghh thanda vahi hai kamil 'nazir' is ja vahi hai raushan-dil ai azizo hava se duniya ki jis ke dil ka na hove hargiz charaghh thanda agar hai manzur ye ki howe hamare sine ka dagh thanda to aa lipatiye gale se ai jaan jhamak se kar jhap charagh thanda hum aur tum jaan ab is qadar to mohabbaton mein hain ek tan man lagaya tum ne jabin pe sandal hua hamara dimagh thanda labon se lagte hi ho gai thi tamam sardi dil-o-jigar mein diya tha saqi ne raat hum ko kuchh aise mai ka ayagh thanda darakht bhige hain kal ke meinh se chaman chaman mein bhara hai pani jo sair kije to aaj sahab ajab tarah ka hai bagh thanda wahi hai kaamil 'nazir' is ja wahi hai raushan-dil ai azizo hawa se duniya ki jis ke dil ka na howe hargiz charagh thanda

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तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ

Fahmi Badayuni

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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

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बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं अहद-ए-वफ़ा से किस लिए ख़ाइफ़ हो मेरी जान कर लो कि तुम ने अहद निभाना तो है नहीं वो जो हमें अज़ीज़ है कैसा है कौन है क्यूँँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं दुनिया हम अहल-ए-इश्क़ पे क्यूँँ फेंकती है जाल हम ने तिरे फ़रेब में आना तो है नहीं वो इश्क़ तो करेगा मगर देख भाल के 'फ़ारिस' वो तेरे जैसा दिवाना तो है नहीं

Rehman Faris

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ज़बाँ तो खोल नज़र तो मिला जवाब तो दे मैं कितनी बार लुटा हूँ मुझे हिसाब तो दे तेरे बदन की लिखावट में है उतार चढ़ाव मैं तुझे कैसे पढूँगा मुझे किताब तो दे तेरा सवाल है साक़ी कि ज़िंदगी क्या है? जवाब देता हूँ पहले मुझे शराब तो दे

Rahat Indori

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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

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हर आन तुम्हारे छुपने से ऐसा ही अगर दुख पाएँगे हम तो हार के इक दिन इस की भी तदबीर कोई ठहराएँगे हम बेज़ार करेंगे ख़ातिर को पहले तो तुम्हारी चाहत से फिर दिल को भी कुछ मिन्नत से कुछ हैबत से समझाएँगे हम गर कहना दिल ने मान लिया और रुक बैठा तो बहत्तर है और चैन न लेने देवेगा तो भेस बदल कर आएँगे हम अव्वल तो नहीं पहचानोगे और लोगे भी पहचान तो फिर हर तौर से छुप कर देखेंगे और दिल को ख़ुश कर जाएँगे हम गर छुपना भी खुल जावेगा तो मिल कर अफ़्सूँ-साज़ों से कुछ और ही लटका सेहर-भरा उस वक़्त बहम पहुँचाएँगे हम जब वो भी पेश न जावेगा और शोहरत होवेगी फिर तो जिस सूरत से बन आवेगा तस्वीर खिंचा मंगवाएँगे हम मौक़ूफ़ करोगे छुपने को तो बेहतर वर्ना 'नज़ीर' आसा जो हर्फ़ ज़बाँ पर लाएँगे फिर वो ही कर दिखलाएँगे हम

Nazeer Akbarabadi

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