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mire baare men kuchh socho mujhe niind aa rahi hai mujhe zaaea na hone do mujhe niind aa rahi hai mire andar ke dukh chehre se zahir ho rahe hain miri tasvir mat khincho mujhe niind aa rahi hai to kya saare gile-shikve abhi kar loge mujh se kuchh ab kal ke liye rakkho mujhe niind aa rahi hai sahar hogi to dekhenge ki hain kya kya masail zara si der sone do mujhe niind aa rahi hai tumhara kaam hai saari hisen bedar rakhna mire shane pe sar rakkho mujhe niind aa rahi hai bahut kuchh tum se kahna tha magar main kah na paaya lo meri diary rakh lo mujhe niind aa rahi hai mere bare mein kuchh socho mujhe nind aa rahi hai mujhe zaea na hone do mujhe nind aa rahi hai mere andar ke dukh chehre se zahir ho rahe hain meri taswir mat khincho mujhe nind aa rahi hai to kya sare gile-shikwe abhi kar loge mujh se kuchh ab kal ke liye rakkho mujhe nind aa rahi hai sahar hogi to dekhenge ki hain kya kya masail zara si der sone do mujhe nind aa rahi hai tumhaara kaam hai sari hisen bedar rakhna mere shane pe sar rakkho mujhe nind aa rahi hai bahut kuchh tum se kahna tha magar main kah na paya lo meri diary rakh lo mujhe nind aa rahi hai

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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को

Naseer Turabi

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ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई नई है अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई नई है अभी न आएँगी नींद तुम को, अभी न हम को सुकूँ मिलेगा अभी तो धड़केगा दिल ज़ियादा, अभी मुहब्बत नई नई है बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएँ फ़ज़ा में ख़ुशबू नई नई है गुलों में रंगत नई नई है जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा के आके बैठे हो पहली सफ़ में अभी क्यूँ उड़ने लगे हवा में अभी तो शोहरत नई नई है बमों की बरसात हो रही है, पुराने जांबाज़ सो रहे हैं ग़ुलाम दुनिया को कर रहा है वो जिस की ताक़त नई नई है

Shabeena Adeeb

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कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला

Tehzeeb Hafi

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तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ

Fahmi Badayuni

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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ढूँढ़ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा दोनों इंसाँ हैं तो क्यूँँ इतने हिजाबों में मिलें आज हम दार पे खींचे गए जिन बातों पर क्या अजब कल वो ज़माने को निसाबों में मिलें अब न वो मैं न वो तू है न वो माज़ी है 'फ़राज़' जैसे दो शख़्स तमन्ना के सराबों में मिलें

Ahmad Faraz

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मिरे बारे में कुछ सोचो मुझे नींद आ रही है मुझे ज़ाएअ'' न होने दो मुझे नींद आ रही है मिरे अंदर के दुख चेहरे से ज़ाहिर हो रहे हैं मिरी तस्वीर मत खींचो मुझे नींद आ रही है तो क्या सारे गिले-शिकवे अभी कर लोगे मुझ से कुछ अब कल के लिए रक्खो मुझे नींद आ रही है सहर होगी तो देखेंगे कि हैं क्या क्या मसाइल ज़रा सी देर सोने दो मुझे नींद आ रही है तुम्हारा काम है सारी हिसें बेदार रखना मिरे शाने पे सर रक्खो मुझे नींद आ रही है बहुत कुछ तुम से कहना था मगर मैं कह न पाया लो मेरी डाइरी रख लो मुझे नींद आ रही है

Mohsin Asrar

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मुझे मलाल भी उस की तरफ़ से होता है मगर ये हाल भी उस की तरफ़ से होता है मैं टूटता भी हूँ और ख़ुद ही जुड़ भी जाता हूँ कि ये कमाल भी उस की तरफ़ से होता है पुकारता भी वही है मुझे सफ़र के लिए सफ़र मुहाल भी उस की तरफ़ से होता है जवाब देता है मेरे हर इक सवाल का वो मगर सवाल भी उस की तरफ़ से होता है वो मेरे हाल से मुझ को ही बे-ख़बर कर दे ये एहतिमाल भी उस की तरफ़ से होता है मैं उस के हिज्र में क्यूँँ टूट कर नहीं रोया ये इक सवाल भी उस की तरफ़ से होता है जब आगही मुझे गुमराह करती है 'मोहसिन' जुनूँ बहाल भी उस की तरफ़ से होता है

Mohsin Asrar

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