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आदतन हम तो किसी से दिल लगा बैठे हैं यूँँ दिल को वो अब रख ही लें ये देखते हैं दोस्तों

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ज़मीं पे आसमाँ पिघला हुआ ही पाओगे समय यूँँ हाथों से निकला हुआ ही पाओगे किसी के वास्ते ख़ुद को सँवार कर देखो तुम अपने आप को बदला हुआ ही पाओगे

Naviii dar b dar

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ज़माने में है ये जो तनक़ीद अपनी भला कोई किस रास्ते को चुने यूँँ

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उन इश्क़ के भी हारों को हारा नहीं मिला हम जैसे आशिक़ों को किनारा नहीं मिला यूँँ प्यार में जो उम्र भर उम्मीद थी यही फिर भी किसी से इश्क़ दोबारा नहीं मिला

Naviii dar b dar

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वो अलग किरदार में दिखता है अब आदमी क्यूँ हार में दिखता है अब देख कर दुख होता है दिल को मेरे झूठ हर अख़बार में दिखता है अब

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वो अलग किरदार में दिखता है अब आदमी क्यूँ हार में दिखता है अब देख कर दुख होता है दिल को मेरे झूठ हर अख़बार में दिखता है अब

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