आज हम तो अपनी क़िस्मत आज़माने लग गए आसमाँ जितने थे सब रस्ते बताने लग गए ऐ ख़ुदा कश्ती हमारी क्या भँवर में आ गई सब हमारे दोस्त हम को आज़माने लग गए
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मेरे हुजरे में नहीं और कहीं पर रख दो आसमाँ लाए हो ले आओ ज़मीं पर रख दो
Rahat Indori
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उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा आसमाँ पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा
Iftikhar Naseem
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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लिख के उँगली से धूल पे कोई ख़ुद हँसा अपनी भूल पे कोई याद कर के किसी के चेहरे को रख गया होंठ फूल पे कोई
Sandeep Thakur
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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तुम सेे दिल को यही शिकायत है ये मोहब्बत है या अदावत है
Muneer shehryaar
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उस की तस्वीर से अक्सर मैं कहा करता हूँ बे वफ़ा तू है मगर मैं तो वफ़ा करता हूँ
Muneer shehryaar
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सारी दुनिया को रौशनी दे कर चांँदनी बे लिबास होती है
Muneer shehryaar
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मैं रोना भी अगर चाहूँ तो खुल कर रो नहीं पाता अदा अश्कों का हक़ मुझ सेे कभी भी हो नहीं पाता
Muneer shehryaar
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वो जो नज़रों से दूर होते हैं वो ही दिल के सुरूर होते हैं वो ही करते हैं ज़िंदगी काली वो जो आँखों के नूर होते हैं
Muneer shehryaar
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