allah-re un ke husn ki mojiz-numaiyan jis baam par wo aaen wahi koh-e-tur ho
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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कोरे काग़ज़ पर रो रहे हो तुम मैं तो समझा पढ़े लिखे हो तुम क्या कहा मुझ सेे दूर जाना है इस का मतलब है जा चुके हो तुम
Zubair Ali Tabish
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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अच्छे बुरे को वो अभी पहचानते नहीं कमसिन हैं भोले-भाले हैं कुछ जानते नहीं
Nooh Narvi
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माजरा-ए-क़ैस मेरे ज़ेहन में महफ़ूज़ है एक दीवाने से सुनिए एक दीवाने का हाल
Nooh Narvi
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हज़ारों रंज-ए-दिल दे दे के माशूक़ों को झेले हैं ये पापड़ किस ने बेले हैं ये पापड़ मैं ने बेले में
Nooh Narvi
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आते आते राह पर वो आएँगे जाते जाते बद-गुमानी जाएगी
Nooh Narvi
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