बारिश हो जाने के बा'द भी मिट्टी गीली रहती है मैं तेरे जाने के बा'द भी तुझ सेे बातें करता हूँ
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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मोहब्बत अपनी क़िस्मत में नहीं है इबादत से गुज़ारा कर रहे है
Fahmi Badayuni
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न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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जा तुझे जाने दिया जानाँ मेरी जानाँ जान अब तू हो गई अनजान हो जैसे
nakul kumar
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हिज्र में तुम ने केवल बाल बिगाड़े हैं हम ने जाने कितने साल बिगाड़े हैं
Anand Raj Singh
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हम लोग चूंकि दश्त के पाले हुए हैं सो ख़्वाबों में चाहे झील हों, आँखों में पेड़ हैं
Siddharth Saaz
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तमाम मस'अले उठाए फिर रहे हैं हम इसीलिए भी चलते चलते थक गए हैं हम थे कितने कम-नसीब हम कि राबता न था हैं कितने ख़ुशनसीब तुझ को छू रहे हैं हम
Siddharth Saaz
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तू तो वाक़िफ़ है रिवाज़-ए-ग़म से इस के इश्क़ तो तेरा भी ये पहला नहीं है
Siddharth Saaz
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दिल-ए-सोज़ाँ को भी महका रहे हैं हमें जो ख़्वाब तेरे आ रहे हैं तेरे शैदाई पागल हो चुके हैं तिरी तस्वीर चू में जा रहे हैं
Siddharth Saaz
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कभी दरिया में जिन की कश्तियाँ थी वही अब साहिलों पे रो रहे हैं
Siddharth Saaz
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