कभी दरिया में जिन की कश्तियाँ थी वही अब साहिलों पे रो रहे हैं
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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तू बुझा कर रख गया था जबसे इस दिल के चराग़ हम ने इस घर में नहीं की रौशनाई आज तक
Siddharth Saaz
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तू तो वाक़िफ़ है रिवाज़-ए-ग़म से इस के इश्क़ तो तेरा भी ये पहला नहीं है
Siddharth Saaz
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चारा-गर तो तभी बचा पाएँगे ना चारा-गर की जान बचाओ पहले तो
Siddharth Saaz
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मिलेगी क़ैद से कैसे रिहाई कौन सोचेगा यहाँ तेरे सिवा तेरी भलाई कौन सोचेगा ज़माने भर का तू सोचेगा तो फिर तेरे बारे में मुझे तू ही बता दे मेरे भाई, कौन सोचेगा?
Siddharth Saaz
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ये है पहली बात तुझ सेे इश्क़ है दूसरी ये बात, पहली बात सुन
Siddharth Saaz
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