बहुत कुछ खो दिया है तब कहीं अब ख़ुद को पाया है मिरी जाँ इश्क़ हो या दुश्मनी अब मैं न बदलूँगा
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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या'नी अब उस की मुहब्बत का हलफ़ माँगूँ मैं या'नी अब सुर्ख़ लबों पे मैं सियाही फेंकूँ
anupam shah
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तस्वीर ऐसी आई है कुछ अस्ल में तेरी उलझन भी है राहत भी है कुछ वस्ल में तेरी तू गर डरेगा आज तो तेरा भला होगा पर जान ले जो डर उठेगा नस्ल में तेरी
anupam shah
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उस ने वा'दा यही किया मुझ से और फिर भी नहीं मिला मुझ से कैसे दूँगा उसे वही धोखा उस का ज़्यादा है तजरबा मुझ से
anupam shah
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तुम्हें मैं बस तुम्हारी सम्त रख कर लौट आऊँगा मुझे मालूम है जो दर्द है रस्ता भटकने का
anupam shah
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हैं जो बातें ये बस ख़याली हैं और फिर हाथ भी तो ख़ाली हैं
anupam shah
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