नेवला और साँप दोनों लड़ते लड़ते थक गए इक तमाशा कर के सब पैसे मदारी ले गया

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Mehshar Afridi
@mehshar-afridi
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12
Sher
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Ghazal
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
क़सम ख़ुदा की बड़े तजरबे से कहता हूँ गुनाह करने में लज़्ज़त तो है सुकून नहीं
sherKuch Alfaaz
तुम को हिचकी लेने से भी दिक़्क़त थी मैं ने तुम को याद ही करना छोड़ दिया
sherKuch Alfaaz
ऐसे हालात से मजबूर बशर देखे हैं अस्ल क्या सूद में बिकते हुए घर देखे हैं
sherKuch Alfaaz
उसी को हम सफ़र करना पड़ेगा नहीं तो दूर तक ख़ाली सड़क है
sherKuch Alfaaz
जगह की क़ैद नहीं थी कोई कहीं बैठे जहाँ मक़ाम हमारा था हम वहीं बैठे
sherKuch Alfaaz
मेरे होंठों के सब्र से पूछो उस के हाथों से गाल तक का सफ़र
sherKuch Alfaaz
मैं न कहता था हिज्र कुछ भी नहीं ख़ुद को हलकान कर रही थी तुम
sherKuch Alfaaz
दिल ये करता है कि इस उम्र की पगडंडी पर उलटे पैरों से चलूँ फिर वही लड़का हो जाऊँ
sherKuch Alfaaz
दबी कुचली हुई सब ख़्वाहिशों के सर निकल आए ज़रा पैसा हुआ तो च्यूँँटियों के पर निकल आए
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