bhul gai wo shakl bhi aakhir kab tak yaad koi rahta hai
Related Sher
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
545 likes
बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
211 likes
हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
157 likes
किस लिए देखती हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो
Jaun Elia
203 likes
More from Ahmad Mushtaq
यार सब जम्अ' हुए रात की ख़ामोशी में कोई रो कर तो कोई बाल बना कर आया
Ahmad Mushtaq
22 likes
हम अपनी धूप में बैठे हैं 'मुश्ताक़' हमारे साथ है साया हमारा
Ahmad Mushtaq
25 likes
रोज़ मिलने पे भी लगता था कि जुग बीत गए इश्क़ में वक़्त का एहसास नहीं रहता है
Ahmad Mushtaq
24 likes
ये पानी ख़ामुशी से बह रहा है इसे देखें कि इस में डूब जाएँ
Ahmad Mushtaq
34 likes
मैं बहुत ख़ुश था कड़ी धूप के सन्नाटे में क्यूँँ तेरी याद का बादल मेरे सर पर आया
Ahmad Mushtaq
38 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Ahmad Mushtaq.
Similar Moods
More moods that pair well with Ahmad Mushtaq's sher.







