चुप हुए तो घर से निकले जा के दफ़्तर रो पड़े इश्क़ ऐसी जंग है जिस में सिकंदर रो पड़े बस दिलों पर कब किसी का चल सका है इश्क़ में फिर से डायल कर के हम वो एक नंबर रो पड़े
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इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब' कि लगाए न लगे और बुझाए न बने
Mirza Ghalib
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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इक रोज़ खेल खेल में हम उस के हो गए और फिर तमाम उम्र किसी के नहीं हुए
Vipul Kumar
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कुछ न कुछ बोलते रहो हम सेे चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे
Fahmi Badayuni
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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ख़ुदा ने फ़न दिया हम को कि लड़के इश्क़ लिखेंगे ख़ुदा कब जानता था हम, ग़ज़ल में दर्द भर देंगे
Prashant Sharma Daraz
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हम ने अच्छी धाँक जमा रक्खी थी अपनी फिर उस ने छोड़ा और सब पानी कर डाला
Prashant Sharma Daraz
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सारी तेरी मर्ज़ी है पर, दिल में है एक बात कहूँ ज़ुल्फ़ें इतनी सुंदर हो तो, बाँधी थोड़ी जाती है
Prashant Sharma Daraz
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