इक रोज़ खेल खेल में हम उस के हो गए और फिर तमाम उम्र किसी के नहीं हुए
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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दिल भी अजीब ख़ाना-ए-वहदत-पसन्द था इस घर में या तो तू रहा या बे-दिली रही उस ने तो यूँँ ही पेड़ बनाया था रेत पर मिट्टी वहाँ हज़ार बरस तक हरी रही
Vipul Kumar
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उसे तो दौलत-ए-दुनिया भी कम भी पाने को मिरी तो ज़ात का मीज़ान भी ज़ियादा नहीं
Vipul Kumar
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उस हिज्र पे तोहमत कि जिसे वस्ल की ज़िद हो उस दर्द पे ला'नत की जो अश'आर में आ जाए
Vipul Kumar
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बचा के आँख बिछड़ जाएँ उस से चुपके से अभी तो अपनी तरफ़ ध्यान भी ज़ियादा नहीं
Vipul Kumar
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हर मुलाक़ात पे सीने से लगाने वाले कितने प्यारे है मुझे छोड़ के जाने वाले
Vipul Kumar
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