बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे बोल ज़बाँ अब तक तेरी है

Writer
Faiz Ahmad Faiz
@faiz-ahmad-faiz
76
6
Sher
16
Ghazal
54
Nazm
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sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
उन्हीं के फ़ैज़ से बाज़ार-ए-अक़्ल रौशन है, जो गाह गाह जुनूँ इख़्तियार करते रहे
sherKuch Alfaaz
ये दाग़ दाग़ उजाला ये शब-गज़ीदा सहर वो इंतिज़ार था जिस का ये वो सहर तो नहीं
sherKuch Alfaaz
ज़िंदगी क्या किसी मुफ़लिस की क़बा है जिस में हर घड़ी दर्द के पैवंद लगे जाते हैं
sherKuch Alfaaz
ये आरज़ू भी बड़ी चीज़ है मगर हमदम विसाल-ए-यार फ़क़त आरज़ू की बात नहीं
sherKuch Alfaaz
तू जो मिल जाए तो तक़दीर निगूँ हो जाए यूँँ न था मैं ने फ़क़त चाहा था यूँँ हो जाए
sherKuch Alfaaz
मेरी ख़ामोशियों में लर्ज़ां है मेरे नालों की गुम-शुदा आवाज़
sherKuch Alfaaz
'फ़ैज़' थी राह सर-ब-सर मंज़िल हम जहाँ पहुँचे कामयाब आए
sherKuch Alfaaz
न जाने किस लिए उम्मीद-वार बैठा हूँ इक ऐसी राह पे जो तेरी रहगुज़र भी नहीं
sherKuch Alfaaz
हम शैख़, न लीडर, न मुसाहिब, न सहाफ़ी जो ख़ुद नहीं करते वो हिदायत न करेंगे
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