उसे तो दौलत-ए-दुनिया भी कम भी पाने को मिरी तो ज़ात का मीज़ान भी ज़ियादा नहीं
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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बस एक मोड़ मिरी ज़िंदगी में आया था फिर इस के बा'द उलझती गई कहानी मेरी
Abbas Tabish
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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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उसे समझने का कोई तो रास्ता निकले मैं चाहता भी यही था वो बे-वफ़ा निकले
Waseem Barelvi
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बचा के आँख बिछड़ जाएँ उस से चुपके से अभी तो अपनी तरफ़ ध्यान भी ज़ियादा नहीं
Vipul Kumar
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दिल भी अजीब ख़ाना-ए-वहदत-पसन्द था इस घर में या तो तू रहा या बे-दिली रही उस ने तो यूँँ ही पेड़ बनाया था रेत पर मिट्टी वहाँ हज़ार बरस तक हरी रही
Vipul Kumar
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उस हिज्र पे तोहमत कि जिसे वस्ल की ज़िद हो उस दर्द पे ला'नत की जो अश'आर में आ जाए
Vipul Kumar
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मैं तो शब-ए-फ़िराक़ था तुम एक उम्र थी फिर भी ज़ियादा तुम से गुज़ारा गया मुझे
Vipul Kumar
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कुछ इस लिए भी तेरी आरज़ू नहीं है मुझे मैं चाहता हूँ मेरा इश्क़ जावेदानी हो
Vipul Kumar
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