इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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मिरी ग़ज़ल की तरह उस की भी हुकूमत है तमाम मुल्क में वो सब से ख़ूब-सूरत है बहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाम मुझे पता चला वो कितनी ख़ूब-सूरत है
Bashir Badr
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तेरी ख़ता नहीं जो तू ग़ुस्से में आ गया पैसे का ज़ो'म था तेरे लहजे में आ गया सिक्का उछालकर के तेरे पास क्या बचा तेरा ग़ुरूर तो मेरे काँसे में आ गया
Mehshar Afridi
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दिल ऐसा कि सीधे किए जूते भी बड़ों के ज़िद इतनी कि ख़ुद ताज उठा कर नहीं पहना
Munawwar Rana
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ये प्यार तेरी भूल है क़ुबूल है मैं संग हूँ तू फूल है क़ुबूल है तू रूठेगी तो मैं मनाऊँगा नहीं जो रूल है वो रूल है क़ुबूल है
Varun Anand
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ख़ुदा की उस के गले में अजीब क़ुदरत है वो बोलता है तो इक रौशनी सी होती है
Bashir Badr
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ये परिंदे भी खेतों के मज़दूर हैं लौट के अपने घर शाम तक जाएँगे
Bashir Badr
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तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा मगर वो आँखें हमारी कहाँ से लाएगा तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है तुम्हारे बा'द ये मौसम बहुत सताएगा
Bashir Badr
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चराग़ों को आँखों में महफ़ूज़ रखना बड़ी दूर तक रात ही रात होगी
Bashir Badr
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शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है
Bashir Badr
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